गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां पिछले एक साल से परियोजना अधिकारी का पद खाली पड़ा है, जिससे आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, देवभोग ब्लॉक में कुल 94 गांवों के 223 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 9584 हितग्राहियों को सेवाएं दी जाती हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर लंबे समय से स्थायी अधिकारी नहीं होने से व्यवस्था प्रभावित हो रही है। वर्तमान में जिला परियोजना अधिकारी को रायपुर संचालनालय में सहायक संचालक की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है, जिससे वे 225 किलोमीटर दूर रहकर दोनों जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं।
वहीं ब्लॉक स्तर पर सुपरवाइजर को प्रशासनिक प्रभार दिया गया है, लेकिन विभाग में पहले से ही कई सुपरवाइजर पद रिक्त होने के कारण कार्यभार और अधिक बढ़ गया है। इससे योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में व्यवस्थाएं केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं। कई केंद्रों में सहायिका और कार्यकर्ता के पद रिक्त होने से बच्चों के पोषण आहार, गर्म भोजन और अन्य योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
इसके अलावा 9 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया भी पिछले एक वर्ष से लंबित है। आरोप है कि दस्तावेजों में अनियमितताओं के चलते कई अभ्यर्थियों पर कार्रवाई तक हुई है, जिससे नियुक्ति प्रक्रिया और धीमी हो गई है।
जनपद अध्यक्ष पद्मलया निधि ने क्षेत्र का दौरा कर कहा कि योजनाओं के प्रभावित होने से ग्रामीण बच्चों और महिलाओं को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो विभाग की महत्वपूर्ण योजनाएं ग्रामीणों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाएंगी।
वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिले में कुछ परियोजनाओं में पद रिक्त हैं और प्रभारी व्यवस्था के जरिए काम चलाया जा रहा है। जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने बताया कि रिक्त पदों की जानकारी शासन को भेजी गई है और नियुक्तियां होते ही व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा |