नई दिल्ली। भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने उन्नत मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल प्रदर्शन किया है। इस परीक्षण के साथ भारत की मिसाइल सुरक्षा क्षमता और मजबूत हुई है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि की जानकारी देते हुए DRDO के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट ने देश की अत्याधुनिक रक्षा तकनीक की क्षमता को साबित किया है।
परीक्षण के दौरान अलग-अलग इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। इस प्रणाली को लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और मध्यम दूरी के एंटी-शिप खतरों से निपटने के लिए विकसित किया गया है।
क्या है मल्टी-लेयर्ड BMD सिस्टम?
मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुश्मन की मिसाइल को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसमें अत्याधुनिक रडार दुश्मन की मिसाइल का पता लगाते हैं, जिसके बाद कमांड सिस्टम खतरे का आकलन कर इंटरसेप्टर मिसाइल को सक्रिय करता है।
इस सिस्टम की खासियत इसकी कई सुरक्षा परतें हैं। अगर पहली परत किसी कारण से लक्ष्य को रोक नहीं पाती, तो दूसरी और तीसरी परतें सक्रिय होकर खतरे को खत्म करने का प्रयास करती हैं।
ICBM रोकने की क्षमता वाले देशों में शामिल हुआ भारत
इन सफल परीक्षणों के बाद भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे बड़े खतरों को रोकने की क्षमता है। इससे पहले यह तकनीक अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों के पास मानी जाती थी।
क्या होती है ICBM?
ICBM यानी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल ऐसी रणनीतिक मिसाइल होती है, जिसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। यह एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने में सक्षम होती है और परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रख सकती है।
ओडिशा के बालासोर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) में हुए परीक्षणों से पहले सुरक्षा के मद्देनजर आसपास के 11 गांवों से 11,442 लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया था। सफल परीक्षण के बाद सभी लोगों को वापस लौटने की अनुमति दे दी गई।