बंगाल की सियासत में घमासान: फर्जी साइन केस में अभिषेक बनर्जी पर CID का शिकंजा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सीआईडी ने गुरुवार को अभिषेक बनर्जी से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की, लेकिन जांच अधिकारियों के मुताबिक उनके जवाबों से संतुष्टि नहीं हुई। अब उन्हें 14 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

भवानी भवन में हुई लंबी पूछताछ

कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभिषेक बनर्जी सीआईडी मुख्यालय भवानी भवन पहुंचे। करीब छह घंटे तक चली पूछताछ के बाद वह रात 11:28 बजे बाहर निकले।

सीआईडी सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान उनसे विधानसभा से जुड़ी प्रस्ताव पुस्तिका (Resolution Book) और विधायकों के हस्ताक्षरों को लेकर कई सवाल किए गए। अधिकारियों का कहना है कि कई सवालों पर वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

13 विधायकों के बयान दर्ज

जांच एजेंसी ने उन 13 विधायकों के बयान भी दर्ज किए हैं, जिनके हस्ताक्षर कथित तौर पर ब्लॉक अक्षरों में पाए गए थे। आरोप है कि 6 मई की बैठक के नाम पर तैयार प्रस्ताव में कुछ हस्ताक्षर फर्जी तरीके से जोड़े गए।

सीआईडी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रस्ताव पुस्तिका तैयार करने और हस्ताक्षरों से जुड़ी प्रक्रिया में किसकी भूमिका थी।

क्या है पूरा मामला?

मामले की शुरुआत तब हुई जब अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को जानकारी दी कि टीएमसी विधायक दल की बैठक में कुछ पदों पर नियुक्तियों का फैसला लिया गया है। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने बैठक का रिकॉर्ड और विधायकों के हस्ताक्षर वाला प्रस्ताव मांगा।

20 मई को प्रस्ताव पुस्तिका जमा की गई, जिसमें दावा किया गया कि 6 मई की बैठक में 70 विधायक मौजूद थे।

इसके बाद टीएमसी के ही दो विधायकों ने शिकायत कर आरोप लगाया कि ऐसी कोई बैठक नहीं हुई थी और उनके हस्ताक्षर बाद की तारीख में लिए गए थे।

पार्टी के अंदर भी बढ़ा विवाद

मामले के बाद टीएमसी में अंदरूनी खींचतान तेज हो गई। कुछ विधायकों ने प्रस्ताव को फर्जी बताते हुए विरोध किया, जिसके बाद पार्टी ने कार्रवाई भी की।

फिलहाल सीआईडी मामले की जांच कर रही है और अभिषेक बनर्जी से 14 जून को फिर पूछताछ की जाएगी।

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