नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यूजक्लिक और उसके संस्थापक-संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ विदेशी फंडिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई को रद्द करते हुए जांच एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई है।
हाई कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता पर इस तरह की कार्रवाई शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल और गंभीर दुरुपयोग है। अदालत ने कहा कि प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों को सही मान लेने के बावजूद धोखाधड़ी या विश्वासघात जैसा आपराधिक मामला नहीं बनता है।
ED की जांच और FIR दोनों रद्द
अदालत ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की FIR और इसी आधार पर शुरू की गई ED की मनी लॉन्ड्रिंग जांच को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना ठोस सबूत के लंबे समय तक व्यापक जांच चलाना उचित नहीं है।
मामला अगस्त 2020 में दर्ज FIR से जुड़ा था। आरोप लगाया गया था कि न्यूजक्लिक को अमेरिकी कंपनी Worldwide Media Holdings LLC से करीब 9.59 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश मिला था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि शेयरों को भारी प्रीमियम पर खरीदा गया, जिससे विदेशी निवेश नियमों से बचने की कोशिश की गई।
ED की हुई थी एंट्री
FIR के बाद विदेशी फंडिंग मामले में ED ने PMLA के तहत जांच शुरू की थी। एजेंसी ने न्यूजक्लिक के कार्यालय, निदेशकों और शेयरधारकों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी।
ED का दावा था कि न्यूजक्लिक को तीन साल में करीब 38.05 करोड़ रुपये विदेशी फंड के रूप में मिले, जिसमें 9.59 करोड़ रुपये FDI और 28.46 करोड़ रुपये सेवाओं के निर्यात के रूप में बताए गए थे।
UAPA केस में भी हुई थी कार्रवाई
2023 में न्यूजक्लिक के खिलाफ एक अलग मामला भी दर्ज किया गया था। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने UAPA, IPC की धारा 153A और 120B के तहत केस दर्ज किया था। इसी मामले में प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तार किया गया था और कई ठिकानों पर तलाशी ली गई थी।
पांच एजेंसियां कर रही थीं जांच
न्यूजक्लिक मामले में ED समेत कई जांच एजेंसियां अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही थीं। दिल्ली पुलिस, आर्थिक अपराध शाखा, आयकर विभाग और CBI भी मामले से जुड़े पहलुओं की जांच कर चुके हैं।
न्यूजक्लिक एक ऑनलाइन न्यूज पोर्टल है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2009 में प्रबीर पुरकायस्थ ने की थी। यह PPK न्यूजक्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड के तहत संचालित होता है।