कचरा प्रबंधन को लेकर MCD का बड़ा कदम: 5 प्लांट से बदलेगी दिल्ली की तस्वीर

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ते कचरे और लैंडफिल साइटों पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए दिल्ली नगर निगम (MCD) ने बड़ा कदम उठाया है। निगम ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में 5 नए आधुनिक वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की मंजूरी दी है।

इन परियोजनाओं के तहत भलस्वा, ओखला, सिंघोला, गाजीपुर और नरेला-बवाना में कुल 5,900 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाले कचरा प्रसंस्करण केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन पर करीब 596 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

लैंडफिल साइटों पर कम होगा दबाव

MCD के अनुसार, दिल्ली के गाजीपुर, भलस्वा और ओखला लैंडफिल साइटों पर पहले से जमा कचरे को हटाने के लिए बायोमाइनिंग का काम चल रहा है। लेकिन रोजाना बड़ी मात्रा में नया कचरा पहुंचने से समस्या बनी हुई है। नई परियोजनाओं से कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण, रिसाइक्लिंग और संसाधन प्रबंधन बेहतर होगा।

कहां-कहां लगेंगे प्लांट?

  • भलस्वा: 1,800 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता, लागत करीब 214.50 करोड़ रुपये
  • ओखला: 1,400 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता, लागत करीब 152.68 करोड़ रुपये
  • सिंघोला: 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता, लागत करीब 61.26 करोड़ रुपये
  • गाजीपुर: 800 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता, लागत करीब 83.44 करोड़ रुपये
  • नरेला-बवाना: 1,200 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता, लागत करीब 84.78 करोड़ रुपये

भलस्वा में बनेगा सबसे बड़ा संयंत्र

भलस्वा लैंडफिल साइट पर सबसे बड़ा एकीकृत कचरा संसाधन संयंत्र बनाया जाएगा। यहां रोजाना आने वाले हजारों टन कचरे को वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाएगा, जिससे नए कूड़े के पहाड़ बनने की संभावना कम होगी।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा

MCD अधिकारियों का कहना है कि इन प्लांटों के शुरू होने के बाद दिल्ली में कचरे के निपटारे की व्यवस्था मजबूत होगी। इससे लैंडफिल साइटों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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