नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी के जिमखाना क्लब, इंडियन पोलो क्लब और दिल्ली रेस क्लब की जमीन को केंद्र सरकार के नियंत्रण में लेने की प्रस्तावित योजना पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि दिल्ली पहले ही प्रदूषण और हरित क्षेत्र की कमी से जूझ रही है, ऐसे में बचे हुए खुले और हरे क्षेत्रों को खत्म करना चिंता का विषय है।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से सवाल किया कि इन जमीनों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाएगा। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए पूछा, “आपको पोलो क्लब की जमीन क्यों चाहिए? क्या वहां 20 मंजिला इमारत बनाना चाहते हैं?”
दिल्ली के पर्यावरण पर जताई चिंता
अदालत ने कहा कि दिल्ली में हरित क्षेत्र लगातार कम हो रहे हैं और प्रदूषण की समस्या गंभीर बनी हुई है। ऐसे में जो थोड़ी बहुत हरियाली बची है, उसे भी सरकारी नियंत्रण में लेने की कोशिश चिंता बढ़ाने वाली है।
कोर्ट ने कहा कि अगर खुले और हरित क्षेत्रों का स्वरूप बदला गया तो इसका सीधा असर दिल्ली के पर्यावरण और लोगों के जीवन पर पड़ेगा।
पोलो एसोसिएशन ने दी थी चुनौती
यह मामला भारतीय पोलो एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। एसोसिएशन ने 20 मई 2026 को जारी बेदखली नोटिस को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि संबंधित जमीन सार्वजनिक हित और रक्षा से जुड़े कार्यों के लिए जरूरी है। सरकार ने कहा कि मध्य दिल्ली में उपलब्ध जमीन सीमित है और कई महत्वपूर्ण गतिविधियों के लिए इसका उपयोग आवश्यक है।
ऊंची इमारतों पर भी कोर्ट ने उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा कि अगर इन जगहों पर ऊंची इमारतें बनाई जाती हैं तो इसे जनहित कैसे माना जा सकता है। अदालत ने कहा कि दिल्ली पहले ही अत्यधिक निर्माण और बढ़ती आबादी के दबाव का सामना कर रही है।
कोर्ट ने कहा कि राजधानी के लोगों को पहले से ही प्रदूषण की गंभीर समस्या झेलनी पड़ रही है और ऐसे में हरित क्षेत्रों का संरक्षण बेहद जरूरी है। मामले में अगली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार का जवाब अहम होगा।