NEET पेपर लीक और OSM विवाद की जांच तेज, NTA-CBSE पर संसदीय समिति का शिकंजा

नई दिल्ली। NEET पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम से जुड़े विवादों की जांच कर रही संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और CBSE पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं। समिति ने दोनों संस्थानों से लिखित जवाब भी मांगे हैं।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने NTA से पूछा कि उनकी नजर में ‘पेपर लीक’ की परिभाषा क्या है। वहीं, CBSE से यह सवाल किया गया कि OSM का ठेका देने से पहले Coempt कंपनी की बैकग्राउंड जांच की गई थी या नहीं।

NTA का दावा – पेपर लीक नहीं हुआ

समिति ने NTA से यह पूछा कि 2018 से अब तक आयोजित परीक्षाओं में क्या कभी पेपर लीक हुआ है। हाल ही में NTA अधिकारियों ने दावा किया कि उनका सिस्टम सुरक्षित था और केवल एक ‘गेस पेपर’ प्रसारित हुआ। समिति ने NTA से आंतरिक ढांचे, मैनपावर, पिछले तीन साल के कर्मचारियों की संख्या और 2022 से अब तक हुई नई नियुक्तियों का पूरा विवरण मांगा।

Coempt के काले रिकॉर्ड पर सवाल

समिति ने CBSE से सवाल किया कि क्या बोर्ड को यह जानकारी थी कि Coempt के डायरेक्टर पहले Globrera Technologies से जुड़े रहे हैं। 2019 में तेलंगाना 12वीं बोर्ड परीक्षा में Globrera के सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी पाई गई थी। बाद में कंपनी का नाम बदलकर Coempt रखा गया। समिति ने पूछा कि CBSE ने इस विवादित इतिहास को नजरअंदाज कर कंपनी को OSM का ठेका क्यों दिया।

इसके अलावा, समिति ने OSM के तीसरे टेंडर में खराब रिकॉर्ड वाली कंपनियों को अयोग्य ठहराने की शर्त क्यों हटाई गई और 12वीं की आंसर शीट की स्कैनिंग में मॉडर्न रोबोटिक स्कैनर की बजाय सामान्य स्कैनर इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी गई।

राहुल गांधी ने भी उठाए थे सवाल

27 मई को राहुल गांधी ने दावा किया था कि CBSE ने जिस Coempt कंपनी को डिजिटल मूल्यांकन का ठेका दिया, उसका पहले Globrera नाम था। उन्होंने सवाल किया कि Coempt को यह ठेका किसके कहने पर और क्यों दिया गया।

OSM विवाद और प्रशासनिक बदलाव

CBSE OSM विवाद मई 2026 में सामने आया था, जिसमें कक्षा 12 के डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर बड़ी शिकायतें आईं। इसके बाद 2 जून 2026 को केंद्र सरकार ने CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई 18 वर्षीय छात्र सार्थक के 7 पेज के प्रेजेंटेशन के बाद हुई, जिसमें उन्होंने OSM टेंडर प्रक्रिया की खामियों को उजागर किया और बोर्ड से सवाल किए। इसके बाद ही प्रशासनिक बदलाव किया गया।

निष्कर्ष: संसदीय समिति की जांच ने NTA और CBSE दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Coempt कंपनी का विवादित रिकॉर्ड और पेपर लीक के आरोप चर्चा में हैं, और अब दोनों संस्थानों को लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है।

 

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