बिलासपुर/नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के कारोबारी विजय कुमार केला को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर, चार्जशीट और निचली अदालत की कार्यवाही को रद्द करते हुए कहा कि बैंक लोन विवाद का आपसी सहमति से निपटारा और डीआरटी की मंजूरी मिलने के बाद धोखाधड़ी का आपराधिक मामला चलाना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि व्यावसायिक विवादों के सेटलमेंट के बाद भी आपराधिक मुकदमे जारी रखना न्याय के हित में नहीं है। अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में क्रिमिनल कार्रवाई जारी रहने से बैंकिंग और आर्थिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है तथा लोग वन-टाइम सेटलमेंट से बचने लगेंगे।
मामला रायपुर निवासी विजय कुमार केला और उनकी फर्म मेसर्स मोहन ट्रेडर्स से जुड़ा है। फर्म ने यूको बैंक से ऋण लिया था, जो बाद में एनपीए घोषित हो गया। डीआरटी में लंबित मामले के दौरान बैंक और फर्म के बीच 6.49 करोड़ रुपये की बकाया राशि के बदले 4.25 करोड़ रुपये में फुल एंड फाइनल सेटलमेंट हुआ था।
हालांकि, खाता बंद होने के करीब ढाई साल बाद यूको बैंक ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि फर्जी ऑडिट रिपोर्ट और संपत्तियों से जुड़े तथ्यों को छिपाकर ऋण सीमा बढ़वाई गई थी। इसके आधार पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी। हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां कारोबारी के पक्ष में फैसला सुनाया गया।