बेंगलुरु। रेप के एक मामले की सुनवाई के दौरान कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपराध और सजा को लेकर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि देश में अपराधियों के मन से कानून का डर कम होता जा रहा है और सख्त दंड के अभाव में अपराध करना आसान हो गया है।
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस आर. नटराज ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अपराधियों के खिलाफ पर्याप्त कठोरता नहीं दिखाई जाती, जिससे दंड का निवारक प्रभाव कमजोर पड़ गया है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि कुछ देशों में अपराधों के लिए बेहद सख्त सजा का प्रावधान है, जिसके कारण लोग कानून तोड़ने से पहले कई बार सोचते हैं।
यह टिप्पणी मणिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), मणिपाल के छात्र गोपी रेड्डी कार्तिक रेड्डी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। आरोपी छात्र 5 अप्रैल से न्यायिक हिरासत में है। उस पर अपनी सहपाठी के साथ उसकी इच्छा के विरुद्ध यौन शोषण करने का आरोप है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और शिकायतकर्ता पहले रिश्ते में थे। बाद में दोनों के बीच दूरी बढ़ गई, जिसके बाद छात्रा ने आरोपी पर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच जारी है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर तत्काल फैसला नहीं सुनाया और राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 8 जून को निर्धारित की गई है।
अदालत की टिप्पणियों को लेकर कानूनी और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, यह टिप्पणियां सुनवाई के दौरान व्यक्त न्यायिक विचार हैं और इन्हें किसी नए कानूनी निर्देश या आदेश के रूप में नहीं देखा जा रहा है।