विदेश | अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही परमाणु वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों ने 60 दिनों के अंतरिम परमाणु समझौते (MoU) पर सहमति बना ली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई के हस्ताक्षर के बाद यह डील लागू हो सकती है।
समझौते की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को पूरी तरह सुरक्षित और बाधारहित बनाएगा। इसके बाद वहां से गुजरने वाले जहाजों पर कोई रोक नहीं होगी और न ही अतिरिक्त टोल लगाया जाएगा। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
समझौता दो चरणों में लागू होगा। पहले चरण में अंतरिम समझौते के प्रमुख बिंदु लागू होंगे, जबकि दूसरे चरण में स्थायी और व्यापक परमाणु समझौते के लिए नई बैठकें होंगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान को इस अंतरिम समझौते का गारंटर बनाने की संभावना है।
समझौते के तहत ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने का भरोसा दिया है। ईरान के पास मौजूद लगभग 440 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम फिलहाल देश के भीतर ही रहेगा।
डील के तहत ईरान को कतर में रोकी गई कुछ रकम वापस मिलने की संभावना है। अनुमान है कि ईरान कम से कम 12 बिलियन डॉलर की राशि चाहता है, जिसे वह राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में इस्तेमाल कर सके।
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अगर परमाणु समझौता सफल रहता है तो डोनाल्ड ट्रंप ईरान के तेल और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में लगभग 300 अरब डॉलर तक निवेश कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता लागू होने पर मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, वैश्विक तेल सप्लाई स्थिर हो सकती है और अमेरिका-ईरान रिश्तों में नई शुरुआत संभव हो सकती है।