देश | देशभर में आज त्याग और बलिदान का पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) पूरे अकीदत और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह पर्व इस्लाम धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है, जिसे पैगंबर हजरत इब्राहिम की अल्लाह के प्रति अटूट आस्था और कुर्बानी की भावना की याद में मनाया जाता है। Eid al-Adha
सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों में बड़ी संख्या में नमाजी जुटे और ईद की विशेष नमाज अदा की गई। नमाज के बाद देश में अमन, चैन और भाईचारे की दुआएं मांगी गईं।
देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग दिन मनाई गई ईद
दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम ने स्पष्ट किया कि भारत में अधिकांश स्थानों पर बकरीद 28 मई को मनाई जा रही है, जबकि कश्मीर के कुछ इलाकों में स्थानीय चांद दिखाई देने की पुष्टि के आधार पर यह पर्व एक दिन पहले यानी 27 मई को ही मनाया गया।
कुर्बानी की परंपरा और उसका संदेश
ईद-उल-अजहा की सबसे अहम परंपरा कुर्बानी है, जिसे धार्मिक आस्था और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि हजरत इब्राहिम ने अल्लाह के आदेश पर अपने पुत्र की कुर्बानी देने का संकल्प लिया था, लेकिन उनकी निष्ठा से प्रसन्न होकर अल्लाह ने उनके स्थान पर एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार की।
इसी परंपरा को निभाते हुए मुसलमान ईद की नमाज के बाद कुर्बानी करते हैं। कुर्बानी के मांस को आमतौर पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है—परिवार, रिश्तेदारों/दोस्तों और जरूरतमंदों के बीच, ताकि समाज में सहयोग और समानता का संदेश फैल सके।
त्योहार के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे को बधाई दी और देश में शांति, सौहार्द और भाईचारे की कामना की।