कोलकाता पुलिस की कार्रवाई पर गरमाई राजनीति, अभिषेक के घर से हटाए गए सुरक्षा उपकरण

बंगाल | पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को उस वक्त हलचल मच गई, जब कोलकाता पुलिस की एक टीम सादे कपड़ों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आवास ‘शांतिनिकेतन’ पहुंची। कुछ देर बाद पुलिसकर्मी वहां से एक बड़ा CCTV मॉनिटर और हार्ड डिस्क लेकर बाहर निकले। हालांकि पुलिस ने मीडिया के सवालों पर चुप्पी साधे रखी।

घटना के बाद बंगाल की राजनीति गरमा गई है। टीएमसी ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है, जबकि पुलिस का कहना है कि यह सिर्फ सरकारी सुरक्षा उपकरण हटाने की नियमित प्रक्रिया थी।

 ‘Z+’ सुरक्षा हटने के बाद कार्रवाई

4 मई को आए चुनावी नतीजों के बाद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई सरकार ने उनकी ‘Z-प्लस’ सुरक्षा वापस ले ली थी।

पहले अभिषेक के घर की सुरक्षा में कोलकाता पुलिस की कई यूनिट्स और बख्तरबंद वाहन तैनात रहते थे। लेकिन सुरक्षा हटने के बाद वहां सीमित पुलिस बल ही मौजूद रहता है।

सादे कपड़ों में पहुंची पुलिस टीम

सोमवार को अतिरिक्त पुलिस बल की मौजूदगी के बीच कुछ अधिकारी सादे कपड़ों में अभिषेक बनर्जी के घर पहुंचे। कुछ देर बाद टीम एक CCTV मॉनिटर और हार्ड डिस्क लेकर बाहर निकली। इस दौरान घर के बाहर बड़ी संख्या में मीडिया कर्मी मौजूद थे, लेकिन पुलिस अधिकारियों ने कोई बयान नहीं दिया।

पुलिस ने क्या कहा?

कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि इसे “अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा” नहीं बनाया जाना चाहिए। पुलिस के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी की ‘Z-प्लस’ सुरक्षा हटने के बाद वहां लगे हाई-टेक सुरक्षा उपकरण वापस लिए जा रहे हैं, क्योंकि वे सरकारी संपत्ति हैं।

अधिकारियों ने बताया कि घर के एंट्रेंस पर लगा सिक्योरिटी स्कैनर मॉनिटर हटाया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अतिरिक्त कैमरे भी वापस लिए गए हैं।

TMC ने BJP पर लगाया बदले की राजनीति का आरोप

तृणमूल कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर बीजेपी और राज्य सरकार पर निशाना साधा है। टीएमसी नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई।

उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ सिक्योरिटी उपकरण हटाने के लिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिस बल की जरूरत क्यों पड़ी। गोखले ने कहा कि यह “सनसनी फैलाने की कोशिश” थी।

हालांकि पश्चिम बंगाल बीजेपी ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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