पश्चिम बंगाल | पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नई चर्चा शुरू हो गई जब दिल्ली के पुराने बंग भवन में तृणमूल कांग्रेस (तृणमूल कांग्रेस) के विधायक ऋतब्रत बनर्जी और राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अचानक मुलाकात सामने आई। इस मुलाकात ने पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और बदलाव की अटकलों को हवा दे दी है।
सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात पूरी तरह अनौपचारिक थी, लेकिन दोनों नेताओं के बीच बातचीत को लेकर राजनीतिक हलकों में कई तरह की व्याख्याएँ की जा रही हैं। इसी दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ दिल्ली स्थित रेजिडेंट कमिश्नर भी मौजूद थे।
मुलाकात के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने इसे “शिष्टाचार भेंट” बताया। उन्होंने कहा कि वह दिल्ली अपने व्यक्तिगत और प्रशासनिक कार्यों के लिए आए थे, जिसमें डिप्लोमैटिक पासपोर्ट जमा कर सामान्य पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया भी शामिल थी।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्यसभा सदस्य रहने के दौरान उनके पास डिप्लोमैटिक पासपोर्ट था, लेकिन अब विधायक होने के नाते वे इसके पात्र नहीं हैं। इसके अलावा उन्होंने सरकारी आवास से जुड़े बकाया किराए के भुगतान के लिए भी दिल्ली यात्रा की बात कही।
हालांकि, इस मुलाकात के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि हाल के दिनों में ऋतब्रत बनर्जी ने पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए थे। इससे पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चा पहले से ही तेज थी।
इसी बीच, एक अन्य घटनाक्रम में तृणमूल कांग्रेस नेता कुणाल घोष को बीसी राय शिशु अस्पताल की रोगी कल्याण समिति में शामिल किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इसे भी राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में पश्चिम बंगाल की सियासत में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है, खासकर जब पार्टी पहले से ही अंदरूनी असंतोष की चर्चाओं का सामना कर रही है।