रायपुर | भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेन्द्र भूषण ने मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील से सौजन्य भेंट की। इस दौरान जलग्रहण प्रबंधन, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, छत्तीसगढ़ भुईयां पोर्टल, पंजीयन एवं स्टाम्प और ई-कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
इसके बाद नरेन्द्र भूषण ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वाणिज्यिक कर (पंजीयन एवं स्टाम्प) तथा छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागीय कार्यों और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की सचिव शम्मी आबिदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में भू-अभिलेखों का कम्प्यूटरीकरण किया जा चुका है। भूमि रिकॉर्ड के लिए आधुनिक रिकॉर्ड रूम बनाए गए हैं और भू-नक्शों का डिजिटलीकरण भी किया गया है। उन्होंने बताया कि रेवेन्यू ई-कोर्ट के माध्यम से राजस्व प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है तथा भुईयां पोर्टल पर डिजिटल किसान किताब अपडेट की गई है, जिससे भूमि स्वामी ऑनलाइन अपनी जानकारी डाउनलोड कर सकते हैं।
पंजीयन एवं स्टाम्प विभाग द्वारा ई-पंजीयन प्रणाली के जरिए दस्तावेजों की रजिस्ट्री को आसान, पारदर्शी और पेपरलेस बनाया गया है। अब दस्तावेज ऑनलाइन उप-पंजीयक को प्रस्तुत किए जा रहे हैं और व्हाट्सएप अलर्ट के माध्यम से क्रेता-विक्रेता को रजिस्ट्री प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिल रही है।
बैठक में छत्तीसगढ़ राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–जलग्रहण क्षेत्र विकास घटक के तहत संचालित परियोजनाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2021-22 में 45 परियोजनाओं को स्वीकृति मिली थी, जिनमें 27 जिलों के 43 विकासखंडों के 387 माइक्रो वाटरशेड शामिल हैं। इन परियोजनाओं का कुल उपचारित क्षेत्रफल 2.50 लाख हेक्टेयर और लागत 613.66 करोड़ रुपए है। भारत सरकार द्वारा हाल ही में 30 करोड़ 14 लाख रुपए की केंद्रांश राशि जारी कर परियोजना अवधि 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाई गई है।
बैठक में वाणिज्यिक कर (पंजीयन) विभाग के सचिव भुवनेश यादव, संयुक्त सचिव नितिन खाडे, संचालक श्याम कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।