कोलकाता | पश्चिम बंगाल के नए खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री अशोक कीर्तनिया ने राज्य की राशन प्रणाली में बड़ा फैसला लिया है। सरकारी राशन (PDS) की सूची से गेहूं का आटा बंद कर दिया गया है। मंत्री का कहना है कि आटे की पिसाई, पैकिंग और गोदाम से राशन दुकानों तक पहुंचने में बिचौलियों और भ्रष्ट अधिकारियों ने करोड़ों रुपए हड़प लिए थे।
निर्णय का मकसद
- भ्रष्टाचार रोकना: आटे की सप्लाई में सबसे अधिक सेंधमारी और मिलावट होती थी।
- गुणवत्ता सुधार: अक्सर राशन में मिलने वाला आटा खाने योग्य नहीं होता था।
- सर्जिकल स्ट्राइक: नई सरकार भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासनिक कदम उठा रही है।
आम जनता पर असर
- राशन कार्ड धारकों को अब गेहूं पिसवाने और चक्की पर ले जाने की परेशानी होगी।
- मजदूर और गरीब परिवारों के लिए पिसाई की अतिरिक्त लागत उत्पन्न होगी।
- सरकार ने एक हफ्ते का समय मांगा है ताकि नई कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) तैयार हो और राशन वितरण का नया मॉडल सामने आए।
विशेषज्ञों की राय
- वरिष्ठ पत्रकार सुदीप्तो सेनगुप्ता: भ्रष्टाचार रोकने के लिए सप्लाई चेन को डिजिटल और पारदर्शी बनाना चाहिए था, न कि सीधे आटा बंद करना।
- फूड सिक्योरिटी एक्सपर्ट रितिका खेड़ा: अगर सरकार साबुत गेहूं देती है, तो मिलावट की गुंजाइश कम होगी।
भविष्य का रास्ता
- संभावना है कि सरकार अब साबुत या फोर्टिफाइड गेहूं देगी।
- ई-पॉस (e-PoS) मशीनों का 100% इस्तेमाल अनिवार्य किया जा सकता है।
- भ्रष्टाचार मुक्त राशन और बेहतर पोषण सुनिश्चित करने के लिए सात दिन के भीतर नई योजना की घोषणा होने की उम्मीद है।
राजनीतिक मायने
- यह कदम सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि पूर्व सरकार के भ्रष्ट सिस्टम पर नकेल कसने की भी रणनीति माना जा रहा है।
- भाजपा इसे ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ उठाया गया कदम बताती रही है।
निष्कर्ष
अशोक कीर्तनिया ने अपनी पारी की शुरुआत ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से की है। सात दिन बाद पता चलेगा कि गरीबों की थाली सुरक्षित रहेगी या यह कदम सिर्फ भ्रष्टाचार के खिलाफ राजनीतिक संदेश तक सीमित रह जाएगा।