कवर्धा | बच्चों में बढ़ते मधुमेह, विशेषकर टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) की समय पर पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग एवं युनीसेफ छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय दो सत्रीय उन्मुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में जिले के ग्रामीण सेक्टर सुपरवाइजर, एलएचवी और आरबीएसके (चिरायु) टीम सहित कुल 70 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का उद्देश्य और मुख्य विषय:
- स्वास्थ्य कर्मियों को टाइप-1 डायबिटीज के प्रारंभिक लक्षणों की शीघ्र पहचान और समयानुकूल उपचार के बारे में तकनीकी जानकारी प्रदान करना।
- समुदाय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करना।
- टाइप-1 डायबिटीज की पहचान, उपचार, प्रबंधन, काउंसलिंग और रोगी सहायता समूहों की भूमिका।
- समुदाय आधारित जागरूकता रणनीतियां, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक सहयोग।
मुख्य बातें और विशेषज्ञों की सलाह:
- टाइप-1 डायबिटीज के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास, बार-बार भूख लगना, अचानक वजन घटना, कमजोरी, धुंधला दिखाई देना, घाव का देर से भरना और व्यवहार में बदलाव शामिल हैं।
- रोकथाम के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण, मीठे पेय पदार्थों से दूरी, नियमित स्वास्थ्य जांच और बच्चों में स्वस्थ आदतों का विकास आवश्यक है।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की भागीदारी:
कार्यशाला का संचालन यूनिसेफ टीम द्वारा डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेंद्र कुमार तूरे ने इसे बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में प्रेरक पहल बताया। जिला नोडल अधिकारी एनसीडी डॉ. हर्षित तुवानी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्रीमती अनुपमा तिवारी, जिला सलाहकार सुश्री आकांक्षा लिखार और अस्पताल सलाहकार श्री अरुण पवार ने भी कार्यशाला में विशेष सहयोग प्रदान किया।
इस प्रशिक्षण से प्रतिभागियों ने समूह गतिविधियों एवं अनुभव साझा करते हुए बाल मधुमेह से प्रभावित बच्चों की बेहतर देखभाल और उपचार की संभावनाओं को मजबूत किया।