नई दिल्ली| अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी Moody’s ने 2026 और 2027 के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर में कटौती की है। एजेंसी का अनुमान है कि इस साल भारत की GDP ग्रोथ 0.8 प्रतिशत प्वाइंट्स घटकर 6% रह सकती है। वहीं, कैलेंडर ईयर 2027 के लिए ग्रोथ अनुमान 0.5 प्वाइंट घटाकर 6% किया गया है।
Moody’s का आकलन:
मूडीज ने अपनी Global Macro Outlook (May 2026) रिपोर्ट में कहा कि तेल और गैस की बढ़ती कीमतों और उर्वरकों (fertilizers) की कमी से अलग-अलग देशों की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लंबी चलने वाली टकराव स्थिति भी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ा रही है।
ग्रोथ में कमी की प्रमुख वजहें:
1. कमजोर निजी खपत (Private Consumption): महंगाई बढ़ने से आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च बढ़ जाता है, जिससे गैर-जरूरी खरीदारी और निवेश घटते हैं।
2. पूंजी निर्माण (Capital Formation) में सुस्ती :कंपनियां नई फैक्ट्रियां, मशीनरी या बड़े निवेश टाल सकती हैं, जिससे निजी निवेश की गति धीमी पड़ती है।
3. औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव: तेल और गैस की बढ़ी कीमतें उत्पादन लागत बढ़ाती हैं। इसके परिणामस्वरूप कंपनियों का मुनाफा घटता है या कीमतें बढ़ती हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है।
4. ऊर्जा निर्भरता: भारत की ऊर्जा जरूरतें, खासकर कच्चे तेल और गैस पर निर्भरता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर GDP पर डालती हैं।
आम आदमी पर असर:
दिल्ली यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर अक्षय मिश्रा के अनुसार, GDP ग्रोथ में कमी से नई नौकरियों के अवसर घट सकते हैं , खासकर युवाओं और फ्रेशर्स के लिए। कॉन्ट्रैक्ट नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है और वेतन वृद्धि धीमी पड़ सकती है। छोटे व्यवसाय, दुकानदार और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग भी कमजोर मांग का सामना कर सकते हैं।
शेयर बाजार और निवेश पर असर:
फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली का कहना है कि सरकार को विकास को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और नीतिगत कदम बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा। निवेश सलाहकार विनोद रावल ने बताया कि कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ने और बाजार में गिरावट की स्थिति निवेशकों को नुकसान पहुँचा सकती है।
उम्मीदें अभी बाकी हैं:
Moody’s ने कहा कि तेल और गैस की सप्लाई धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है। भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है और सौर, पवन एवं जल ऊर्जा पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, देश की बिजली का करीब 70% उत्पादन कोयले से होता है।
मौजूदा हालात में, GDP ग्रोथ में कमी का असर आपकी जेब, रोजमर्रा की खरीदारी, नौकरी और निवेश पर पड़ सकता है। सरकार और निजी कंपनियों के निर्णय अगले छह महीनों में अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे।