बिलासपुर। मस्तूरी में सेवा सहकारी समिति गतौरा में सरकारी धान की 28.51 लाख रुपए की हेराफेरी का मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ कि अध्यक्ष और प्रबंधक समेत तीन लोगों ने कागजों में धान खरीदा दिखाया, लेकिन भौतिक सत्यापन में 919.96 क्विंटल धान गायब पाया गया। मामले में विभाग द्वारा रिपोर्ट दर्ज कराने के बाद पुलिस ने शुक्रवार को तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी में गतौरा से गड़बड़ी की शिकायतें मिल रही थीं। जब संयुक्त जांच दल ने केंद्र का भौतिक सत्यापन किया, तो स्टॉक रजिस्टर और गोदाम में रखे धान में अंतर मिला।
मौके पर कुल 919.96 क्विंटल धान कम पाया गया, जो शासन के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। पुलिस जांच में पाया गया कि सेवा सहकारी समिति के प्रबंधक कोमल चंद्राकर, प्राधिकृत अध्यक्ष राजेंद्र राठौर और कंप्यूटर ऑपरेटर हुलेश्वर धीरही ने आपस में मिलीभगत से धान का गबन किया। तीनों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर धान की बंदरबांट की, जिससे शासन को 28.51 लाख रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ। पकड़े गए तीनों आरोपियों ने पूछताछ में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर 3 अप्रैल को न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा। उनके बयान के आधार पर धान खरीदी प्रभारी लव कुमार यादव और एक अन्य व्यक्ति की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है। पुलिस दोनों के संलिप्त होने और लेन-देन का सुराग तलाश रही है।