रायपुर। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही प्रदेश के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को लेकर शिक्षकों की कमी सामने आई है। राज्य के 1,284 शासकीय स्कूलों में संचालित व्यावसायिक शिक्षा के लिए 478 शिक्षक पद पिछले करीब दो साल से खाली पड़े हैं। अब इन पदों को आउटसोर्सिंग (ठेका व्यवस्था) के जरिए भरने की तैयारी की जा रही है।
शिक्षक संघ ने सरकार के इस फैसले का विरोध करते हुए नियमित भर्ती की मांग की है। संघ का कहना है कि ठेका व्यवस्था के कारण हर साल नियुक्ति प्रक्रिया में देरी होती है, जिससे कई स्कूल लंबे समय तक प्रशिक्षकों के बिना संचालित होते हैं और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है।
शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि व्यावसायिक शिक्षकों के पदों पर नियमित भर्ती की जाए। संघ के अनुसार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों में 25 ट्रेड शुरू किए गए हैं, लेकिन इन विषयों के शिक्षक अभी भी आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त किए जा रहे हैं।
हजारों छात्रों पर पड़ रहा असर
शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि जिन स्कूलों में व्यावसायिक प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां हजारों छात्र कौशल आधारित शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नियमित शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई की निरंतरता प्रभावित होती है और छात्रों को रोजगार से जुड़े प्रशिक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।
संघ के मुताबिक प्रदेश में पिछले करीब 10 वर्षों से व्यावसायिक शिक्षा संचालित हो रही है, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति अब भी ठेका व्यवस्था से की जा रही है। हर साल भर्ती प्रक्रिया में देरी के कारण बड़ी संख्या में पद खाली रह जाते हैं।
शिक्षक संघ ने सरकार से मांग की है कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर नियमित पदों का निर्माण किया जाए और जिन स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, वहां जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत वर्ष 2030 तक सभी स्कूलों में कौशल आधारित शिक्षा के विस्तार का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित व्यावसायिक शिक्षकों की उपलब्धता को जरूरी माना जा रहा है।