10-15 रुपये सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल! दाम बढ़ने पर CTI की बड़ी मांग, राहुल गांधी ने साधा निशाना

देश  | देश  में 10 दिन के भीतर चौथी बार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है। बढ़ती महंगाई को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है, वहीं चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी आम लोगों को राहत देने के लिए पेट्रोल-डीजल 10 से 15 रुपये प्रति लीटर सस्ता करने की मांग उठाई है। CTI ने इसके लिए राज्यों में वैट (VAT) घटाने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।

CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को पत्र लिखकर देशभर के राज्यों के वित्त मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि अगले तीन महीनों तक पूरे देश में पेट्रोल और डीजल पर फ्लैट 5% VAT लागू किया जाए, जिससे उपभोक्ताओं को प्रति लीटर 10-15 रुपये तक राहत मिल सकती है।

गोयल ने कहा कि पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी केंद्र सरकार के अधीन है, लेकिन VAT राज्यों का विषय है। ऐसे में महंगाई से राहत देने के लिए राज्यों को भी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि 21 राज्यों में भाजपा या NDA की सरकारें हैं, इसलिए केंद्र समन्वय बनाकर जल्द फैसला ले सकता है।

CTI ने राज्यों में VAT के भारी अंतर का हवाला भी दिया। संगठन के मुताबिक तेलंगाना में पेट्रोल पर 35.20% VAT लगाया जा रहा है, आंध्र प्रदेश में 31% VAT के साथ अतिरिक्त टैक्स वसूला जाता है, जबकि दिल्ली में यह 19.40% है। वहीं अंडमान-निकोबार में केवल 1% VAT होने के कारण वहां पेट्रोल और डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत कम हैं।

इधर तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल 2.61 रुपये और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा कर दिया है। पिछले 10 दिनों में यह चौथी बढ़ोतरी है और अब तक पेट्रोल-डीजल करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है। कंपनियों ने इसकी वजह मध्य पूर्व में जारी तनाव और ईरान युद्ध से जुड़े वैश्विक तेल संकट को बताया है।

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि “महंगाई मानव मोदी का फिर से हमला हुआ है। पेट्रोल-डीजल के दाम किश्तों में बढ़ाए जा रहे हैं ताकि चुपके-चुपके जनता की जेब काटी जा सके।” राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होते ही सरकार ने जनता पर महंगाई का बोझ डालना शुरू कर दिया है।

बता दें कि 15 मई को पहली बार पेट्रोल-डीजल के दामों में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। इसके बाद 19 मई को करीब 90 पैसे और 23 मई को 87 पैसे की वृद्धि की गई थी। अब 25 मई को फिर दो रुपये से अधिक की बढ़ोतरी के बाद आम लोगों और व्यापारिक सेक्टर पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ गया है।

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