उदयपुर । देश के मेटल और माइनिंग सेक्टर में तकनीक और ऑटोमेशन का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। इसी बदलाव के बीच हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के युवा इंजीनियर्स कंपनी के तकनीकी परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इंजीनियर्स डे के अवसर पर कंपनी ने अपने इंजीनियरिंग वर्कफोर्स से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए बताया कि उसके युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े हैं।
कंपनी के अनुसार, उसके कुल अधिकारियों में 57.8 प्रतिशत इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। 2,685 अधिकारियों की कुल कार्यबल में 1,551 कर्मचारी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से जुड़े हैं। कंपनी का कहना है कि यह तकनीकी विशेषज्ञता अब केवल पारंपरिक संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटलाइजेशन, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्रक्रियाओं और स्मार्ट माइनिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल में भी दिखाई दे रही है।
रिमोट ऑपरेशन से डिजिटल कंट्रोल रूम तक बढ़ा तकनीक का इस्तेमाल
माइनिंग सेक्टर में काम करने वाले इंजीनियर्स की भूमिका पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बदली है। हिंदुस्तान जिंक की इकाइयों में रिमोट ब्लास्टिंग, टेली-रिमोट मशीन ऑपरेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑटोमेटेड प्रक्रियाएं और डिजिटल कंट्रोल रूम जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, युवा इंजीनियर्स इन तकनीकों को ऑपरेशनल जरूरतों से जोड़ने और कामकाज को अधिक सुरक्षित एवं कुशल बनाने में योगदान दे रहे हैं। इसका उद्देश्य भारी मशीनरी और जटिल औद्योगिक प्रक्रियाओं के बीच तकनीक के जरिए बेहतर संचालन सुनिश्चित करना है।
युवा प्रतिभाओं पर कंपनी का बढ़ता फोकस
हिंदुस्तान जिंक के युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं। इसके अलावा कंपनी के करीब 10 प्रतिशत नेतृत्वकारी कर्मचारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं।
युवा प्रतिभाओं को संगठन में शामिल करने के लिए कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 335 कैंपस हायरिंग की। कंपनी के मुताबिक, कैंपस से आने वाली नई प्रतिभाओं के जरिए संगठन में नई तकनीकी सोच और डिजिटल कौशल को बढ़ावा दिया जा रहा है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि आज के इंजीनियर ऐसे उद्योग में प्रवेश कर रहे हैं, जो तेजी से बदल रहा है। उन्होंने कहा कि युवा इंजीनियर्स नई सोच और दृष्टिकोण के साथ जटिल औद्योगिक चुनौतियों के समाधान तलाश रहे हैं। कंपनी का प्रयास ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां उनकी तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा नवाचार में बदल सके।
62% से ज्यादा कर्मचारी 35 साल से कम उम्र के
कंपनी की कार्यबल में युवाओं की हिस्सेदारी भी उल्लेखनीय है। हिंदुस्तान जिंक के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 35 वर्ष से कम उम्र के हैं। कंपनी का लैंगिक विविधता अनुपात 26.3 प्रतिशत है, जबकि महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी 20.5 प्रतिशत बताई गई है।
महिला अधिकारी माइनिंग, मेटलर्जी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और पर्यावरण इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रही हैं। कंपनी का कहना है कि तकनीकी और परिचालन भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इंजीनियरिंग इकोसिस्टम में 423 से ज्यादा गैर-अधिकारी कर्मचारी
कंपनी के इंजीनियरिंग इकोसिस्टम में अधिकारियों के अलावा 423 से अधिक गैर-अधिकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। ये कर्मचारी माइंस और स्मेल्टर्स में विभिन्न इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।
भारी मशीनरी, औद्योगिक उपकरणों और परिचालन प्रक्रियाओं से जुड़े इन कर्मचारियों की भूमिका माइनिंग और मेटल उत्पादन की दैनिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण है।
स्टार्टअप जैसी कार्य संस्कृति पर जोर
डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन के दौर में हिंदुस्तान जिंक बड़े औद्योगिक वातावरण के भीतर स्टार्टअप जैसी कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कहता है। इसके तहत कर्मचारियों को नए विचारों पर काम करने, प्रयोग करने और बेहतर समाधान विकसित करने के अवसर देने पर जोर है।
कंपनी की ‘एम्प्लॉयी फर्स्ट’ नीति के तहत करियर विकास और समान अवसरों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। महिलाओं के लिए विभिन्न शिफ्टों और परिचालन भूमिकाओं में अवसरों के साथ लचीले कार्य घंटे, स्पाउस हायरिंग और बच्चों की देखभाल के लिए एक वर्ष तक के अवकाश जैसी नीतियों का उल्लेख कंपनी ने किया है।
बदलते माइनिंग सेक्टर में इंजीनियरिंग प्रतिभा की बढ़ती भूमिका
मेटल और माइनिंग उद्योग अब पारंपरिक मशीनरी और प्रक्रियाओं से आगे बढ़कर डिजिटल तकनीक, ऑटोमेशन और डेटा आधारित संचालन की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में इंजीनियरिंग प्रतिभाओं की भूमिका भी लगातार व्यापक हो रही है।
हिंदुस्तान जिंक के आंकड़े बताते हैं कि कंपनी की बड़ी संख्या में तकनीकी कार्यबल युवा इंजीनियरों से बनी है। कंपनी के मुताबिक, इन युवाओं की तकनीकी विशेषज्ञता और नई तकनीकों के इस्तेमाल से माइनिंग एवं मेटल उद्योग में सुरक्षित, स्मार्ट और अधिक कुशल कार्यप्रणालियों को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।