नई दिल्ली| देश की बार काउंसिलों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने सभी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने राज्यों की बार काउंसिल में दो महिला सदस्यों को नामित करें।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बार काउंसिलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई बार काउंसिलों में लंबे समय से पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है और संस्थाओं को अधिक समावेशी बनाने की जरूरत है।
यह आदेश राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत आरक्षण व्यवस्था को प्रभावी रूप से लागू करने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि बार काउंसिल के प्रशासनिक और नीतिगत निर्णयों में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करना है।
दो महिला सदस्यों का होगा नामांकन
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार, प्रत्येक राज्य की बार काउंसिल में नामित की जाने वाली दो महिला सदस्यों में से एक हाईकोर्ट की पूर्व महिला न्यायाधीश होंगी और दूसरी बार में प्रतिष्ठित वरिष्ठ महिला वकील होंगी।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नामित महिला सदस्यों का बार काउंसिल की चुनावी राजनीति या किसी गुट से सीधा संबंध नहीं होना चाहिए, ताकि वे स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम कर सकें।
इसके अलावा, चुनाव में हारने वाली योग्य महिला उम्मीदवारों को भी योग्यता के आधार पर सह-नामित करने का विकल्प रखा गया है।
30 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की तैयारी
मामला राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने से जुड़ा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के माध्यम से और 10 प्रतिशत सीटें सह-नामांकन के जरिए महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
सुनवाई के दौरान आरक्षित सीटों पर हस्तांतरणीय वोट प्रणाली (Transferable Vote) से जुड़े तकनीकी मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय को पूर्व न्यायाधीश जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय पर्यवेक्षण समिति को भेजा है। समिति देशभर के वकील संगठनों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करेगी।
नए वकीलों में महिलाओं की संख्या बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में नए पंजीकृत वकीलों में महिलाओं की संख्या करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, लेकिन राज्य बार काउंसिलों के कार्यकारी पदों पर महिलाओं की भागीदारी अभी भी बहुत कम है।
अदालत का यह फैसला बार काउंसिलों में लैंगिक संतुलन और महिलाओं की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।