मुंबई | फिल्म ‘दृश्यम’ में समीर देशमुख उर्फ सैम का किरदार भले ही कुछ मिनटों के लिए नजर आया था, लेकिन इस किरदार ने कहानी पर ऐसा असर छोड़ा कि करीब 11 साल बाद भी दर्शक इसे याद करते हैं। सैम का रोल निभाने वाले ऋषभ चड्ढा ने इस किरदार के बाद अभिनय की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। हालांकि, आज वह सिर्फ एक्टिंग ही नहीं, बल्कि स्टोरीटेलिंग और कविता के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।
‘दृश्यम’ की कहानी में सैम की मौत ही आगे की पूरी कहानी की नींव बनती है। विजय सलगांवकर का परिवार इस घटना को छिपाने के लिए जिस तरह की योजना बनाता है, वही फिल्म के सस्पेंस और ड्रामा को आगे बढ़ाती है।
शाहरुख खान से मिली नेगेटिव रोल करने की प्रेरणा
1994 में जन्मे ऋषभ चड्ढा ने एक्टर बनने के पीछे अपनी मां और अभिनेता शाहरुख खान को प्रेरणा बताया है।
उनका मानना था कि करियर की शुरुआत में नेगेटिव किरदार निभाना जोखिम भरा जरूर है, लेकिन इससे अभिनेता को अलग पहचान मिल सकती है। इसी सोच के साथ उन्होंने ‘दृश्यम’ में सैम का किरदार स्वीकार किया।
बाल कलाकार के तौर पर शुरू हुआ सफर
ऋषभ चड्ढा ने कम उम्र में ही कैमरे का सामना करना शुरू कर दिया था। 2007 में टीवी शो ‘अलादीन’ में उन्होंने नन्हे का किरदार निभाया था।
इसके बाद उन्होंने ‘बेस्ट ऑफ लक निक्की’ जैसे टीवी शो में काम किया। धीरे-धीरे उन्हें मनोरंजन जगत में बड़े प्रोजेक्ट्स मिलने लगे।
2011 में वह फिल्म ‘देसी बॉयज़’ में भी दिखाई दिए। हालांकि इसमें उनका छोटा सा रोल था। इसके बाद 2014 में रिलीज हुई ‘खूबसूरत’ में उन्होंने सोनम कपूर के भाई कबीर का किरदार निभाया।
‘दृश्यम’ ने बदल दी पहचान
2015 में आई ‘दृश्यम’ ऋषभ चड्ढा के करियर का अहम मोड़ साबित हुई। फिल्म में उन्होंने तब्बू और रजत कपूर के बेटे समीर देशमुख यानी सैम का किरदार निभाया।
फिल्म में सैम का किरदार अनु के साथ बदसलूकी करता है और उसे MMS के जरिए धमकाता है। इसी घटनाक्रम के दौरान अनु के हाथों सैम की मौत हो जाती है।
इसके बाद विजय सलगांवकर और उसका परिवार इस घटना को छिपाने के लिए जो योजना बनाता है, वही फिल्म की मुख्य कहानी बन जाती है।
‘दृश्यम’ की वजह से स्कूल में भी हुआ मजेदार वाकया
ऋषभ ने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म रिलीज होने के बाद एक बार उन्हें स्कूल के कार्यक्रम में बतौर गेस्ट बुलाया गया।
जब वह बच्चों से बातचीत करने पहुंचे तो स्कूल के प्रिंसिपल ने मजाक में उनसे कहा कि अपना फोन अंदर ही रखें। यह ‘दृश्यम’ में सैम के MMS वाले किरदार की ओर इशारा था।
इस किस्से से अंदाजा लगाया जा सकता है कि फिल्म में छोटा रोल होने के बावजूद सैम का किरदार दर्शकों के दिमाग में कितना गहराई से बैठ गया था।
नेगेटिव रोल्स की लगी लाइन, लेकिन ऋषभ ने मना किया
‘दृश्यम’ के बाद ऋषभ को कई ऑफर्स मिले। खास तौर पर उन्हें नेगेटिव किरदारों के प्रस्ताव मिलने लगे।
हालांकि उन्होंने लगातार विलेन या निगेटिव रोल करने से दूरी बनाई। वह एक ही तरह के किरदार में बंधना नहीं चाहते थे।
इसके बाद उन्होंने हॉरर, कॉमेडी और ड्रामा जैसे अलग-अलग जॉनर में काम किया। 2018 में वह ‘लुप्त’ में नजर आए, जबकि 2026 में उन्होंने ‘ज़ोर’ नाम की जॉम्बी हॉरर-कॉमेडी फिल्म में लीड रोल किया।
टीवी और OTT पर भी किया काम
फिल्मों के अलावा ऋषभ चड्ढा ने टीवी और वेब सीरीज में भी लगातार काम किया। वह ‘कोटा टॉपर्स’ और ‘आदत से मजबूर’ जैसे टीवी शोज में नजर आए।
इसके अलावा उन्होंने ‘शादी बॉयज़’, ‘बॉयज़ विद टॉयज़’, ‘भूत पूर्व’, ‘इल्लीगल’ और ‘डायवॉर्स के लिए कुछ भी करेगा’ जैसी वेब सीरीज में भी काम किया।
ऋषभ 150 से ज्यादा विज्ञापन फिल्मों में भी दिखाई दे चुके हैं।
अब एक्टिंग के साथ स्टोरीटेलिंग पर फोकस
करीब दो दशक तक कैमरे के सामने काम करने के बाद ऋषभ अब स्टोरीटेलिंग और कविता की तरफ भी बढ़ रहे हैं।
उनका ‘मॉडर्न मजनू’ नाम से स्टोरीटेलिंग सेटअप है, जहां वह अलग-अलग विषयों पर कहानियां और कविताएं सुनाते हैं।
सोशल मीडिया पर भी अब उनकी पहचान सिर्फ ‘दृश्यम’ के सैम के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्टोरीटेलर के रूप में भी बन रही है।
11 साल बाद भी सैम को नहीं भूले दर्शक
‘दृश्यम’ में सैम का किरदार भले ही बहुत ज्यादा देर तक स्क्रीन पर नहीं रहा, लेकिन पूरी कहानी उसी घटना के इर्द-गिर्द घूमती है।
यही वजह है कि ऋषभ चड्ढा आज भी जहां दिखाई देते हैं, दर्शक उन्हें ‘सैम’ के नाम से पहचान लेते हैं। सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट और वीडियो के कमेंट्स में अक्सर लोग मजाकिया अंदाज में लिखते हैं—‘सैम भाई, आपको इस बार भी इंसाफ नहीं मिला।’
फिल्म की कहानी में सैम को भले ही इंसाफ का मौका न मिला हो, लेकिन इस किरदार ने ऋषभ चड्ढा को दर्शकों के बीच ऐसी पहचान जरूर दे दी, जिसे 11 साल बाद भी लोग याद करते हैं।