अमेरिका | अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) ने रूस और ईरान के खिलाफ ‘Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026’ नामक एक नया प्रतिबंध बिल पास कर दिया है। इस बिल के तहत राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की शक्ति दी गई है जो रूस से कच्चा तेल या गैस खरीदते हैं। इसका सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा खरीदारों पर पड़ सकता है। हालांकि, कड़े प्रतिबंधों की इस बात के बीच अमेरिका ने अपने न्यूक्लियर पावर प्लांट्स की जरूरत को देखते हुए रूस से यूरेनियम आयात करने के लिए खुद को विशेष छूट दी है।
प्रमुख बिंदु
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तेल पर सख्त प्रतिबंध और टैरिफ: रूस से ऊर्जा आयात करने वाले देशों को निशाना बनाते हुए नया बिल पारित किया गया है, जिससे भारत और जैसे देशों पर भारी टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है।
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यूरेनियम पर अमेरिका की अपनी मजबूरी: अमेरिकी न्यूक्लियर रिएक्टरों को चलाने के लिए आवश्यक एनरिच्ड यूरेनियम का एक बड़ा हिस्सा (करीब 26% हिस्सा 2025 में) रूस से आता है।
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बिल का सेक्शन 114: इस नए प्रतिबंध कानून के सेक्शन 114 के तहत अमेरिका ने अपने न्यूक्लियर सेक्टर को अचानक ईंधन संकट से बचाने के लिए रूस से यूरेनियम के कुछ आयातों पर छूट का प्रावधान रखा है।
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घरेलू उत्पादन बढ़ाने की कोशिश: अमेरिका अपनी निर्भरता को कम करने के लिए घरेलू स्तर पर यूरेनियम का उत्पादन बढ़ाने में जुटा है (2025 में उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़कर 2.1 मिलियन पाउंड रहा), लेकिन फिलहाल पूरी तरह से रूसी सप्लाई से अलग होना उसके लिए संभव नहीं है।
“अमेरिका एक तरफ रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध और भारी टैरिफ का शिकंजा कस रहा है, वहीं दूसरी तरफ अपने न्यूक्लियर पावर सेक्टर को बचाने के लिए रूस से यूरेनियम की खरीद के रास्ते खुले रख रहा है।”