फ्लाईदुबई के हमाम अल-हमामी का बैकग्राउंड चेक नहीं हुआ? ओमान में उड़ान पर लग चुकी थी रोक

दुबई । फ्लाईदुबई की उस उड़ान में हुए कॉकपिट हमले को लेकर नया खुलासा सामने आया है, जिसमें को-पायलट हमाम अल-हमामी ने कथित तौर पर कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमामी इससे पहले ओमान एयर में काम करता था, लेकिन वहां उसकी गतिविधियों और कथित कट्टरपंथी विचारधारा को लेकर अधिकारियों ने चिंता जताई थी।

दावा है कि ओमान में जांच के बाद उसे विमान उड़ाने से रोक दिया गया था और बाद में पायलट की जिम्मेदारी से हटाकर डेस्क जॉब दी गई थी। अब सवाल उठ रहा है कि ऐसी परिस्थितियों के बावजूद उसे फ्लाईदुबई में पायलट की नौकरी कैसे मिली।

ओमान में ऑनलाइन गतिविधियों की हुई थी जांच

द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक हमामी जब ओमान एयर में काम कर रहा था, तब ओमानी अधिकारियों ने उसकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की थी। इस दौरान कथित तौर पर उसकी कट्टरपंथी विचारधारा में रुचि को लेकर चिंता सामने आई।

रिपोर्ट के अनुसार उसे डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम में भी शामिल किया गया और बाद में पायलट की नौकरी से हटाकर डेस्क जॉब दे दी गई।

हालांकि, रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जब उसने बाद में फ्लाईदुबई में नौकरी के लिए आवेदन किया, तब उसके पिछले रिकॉर्ड से जुड़ी ये चिंताएं एयरलाइन के सामने नहीं रखी गईं।

क्या फ्लाईदुबई ने नहीं किया बैकग्राउंड चेक?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक ओमान ने कथित तौर पर अपनी चिंताओं के बारे में दूसरी एयरलाइंस या संबंधित अधिकारियों को जानकारी नहीं दी थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि फरवरी में फ्लाईदुबई ने हमामी को नौकरी पर रखा तो एयरलाइन ने उसकी पिछली नौकरी को लेकर ओमान से जानकारी नहीं मांगी।

इन दावों के बाद विमानन सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय पायलट भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, बैकग्राउंड चेक की पूरी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका को लेकर अभी आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।

जेडी वेंस बोले- उसे कोई पैसेंजर विमान नहीं उड़ाना चाहिए था

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी फ्लाईदुबई घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए आरोपी को किसी भी एयरलाइन का विमान उड़ाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए थी।

वेंस ने कहा कि अमेरिका अपने एयरलाइन सुरक्षा नियमों की भी समीक्षा कर रहा है। खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि किसी ऐसे व्यक्ति को पैसेंजर विमान उड़ाने से कैसे रोका जाए, जो सुरक्षा के लिए संभावित खतरा हो सकता है।

हालांकि, वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को आरोपी के बारे में पहले से जानकारी होने का दावा नहीं किया जा रहा है।

क्या ईरान की भूमिका थी?

पत्रकारों ने वेंस से फ्लाईदुबई की घटना में ईरान की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल किया। इस पर उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें ईरान की संलिप्तता का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है।

30 सितंबर को क्या हुआ था?

30 सितंबर को फ्लाईदुबई की बोइंग 737 MAX 8 उड़ान दुबई से तेल अवीव जा रही थी। विमान में 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान को-पायलट हमाम अल-हमामी ने कथित तौर पर कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया।

हमले के दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा और करीब 30 सेकंड में हजारों फीट नीचे आ गया। कैप्टन मच्छार हमले में घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद क्रू और यात्रियों की मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया और एक बड़े हादसे को टाल दिया गया।

इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा व्यवस्था और पायलटों की भर्ती एवं बैकग्राउंड वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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