तिल्दा-नेवरा | रायपुर जिले के 77 शासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारपरक एवं कौशल आधारित शिक्षा देने वाले 154 व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने सोमवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़, जिला शिक्षा अधिकारी और जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। प्रशिक्षकों ने मानदेय में बढ़ोतरी, लंबित भुगतान का शीघ्र निराकरण, नौकरी की सुरक्षा और सेवा शर्तों में सुधार की मांग की।
शासकीय स्कूलों में वर्ष 2014 से संचालित व्यावसायिक शिक्षा व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को ब्यूटी एंड वेलनेस, आईटी, ऑटोमोबाइल, एग्रीकल्चर, हेल्थ केयर, रिटेल, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर सहित विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
एनईपी 2020 में कौशल शिक्षा पर जोर, प्रशिक्षकों की स्थिति अस्थिर
प्रशिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कौशल एवं रोजगारपरक शिक्षा को विशेष महत्व दिया गया है। इसके बावजूद इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने वाले प्रशिक्षक स्वयं लंबे समय से कम मानदेय, अस्थिर सेवा व्यवस्था और भुगतान संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को नियमित रूप से कौशल प्रशिक्षण देने के बावजूद उनकी सेवा शर्तों में अपेक्षित सुधार नहीं किया गया है।
हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 मानदेय की मांग
व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर 38,100 प्रतिमाह मानदेय निर्धारित करने की मांग की है। इसके साथ ही प्रत्येक वर्ष नियमित वेतन वृद्धि लागू करने की भी मांग रखी गई है।
प्रशिक्षकों का कहना है कि वर्षों से विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने और अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बावजूद वर्तमान मानदेय उनके अनुभव और कार्यभार के अनुरूप नहीं है।
निजी कंपनियों की व्यवस्था खत्म कर विभागीय व्यवस्था में शामिल करने की मांग
प्रशिक्षकों ने निजी कंपनियों के माध्यम से संचालित वर्तमान व्यवस्था को समाप्त कर उन्हें विभागीय व्यवस्था में शामिल करने और सेवा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
इसके अलावा नई निविदा प्रक्रिया में पहले से कार्यरत एवं अनुभवी व्यावसायिक प्रशिक्षकों को प्राथमिकता देने की मांग भी की गई। प्रशिक्षकों का कहना है कि नई निविदा प्रक्रिया के कारण वर्षों से कार्यरत प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट खड़ा हो सकता है।
लंबित भुगतान और सेवा सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
ज्ञापन के माध्यम से प्रशिक्षकों ने लंबित भुगतान का शीघ्र निराकरण, सम्मानजनक मानदेय, नियमित वेतन वृद्धि और स्थायी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग शासन के समक्ष रखी।
प्रशिक्षकों ने उम्मीद जताई कि शासन उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा। उनका कहना है कि आर्थिक और सेवा संबंधी असुरक्षा दूर होने से वे विद्यार्थियों को और बेहतर तरीके से गुणवत्तापूर्ण कौशल एवं रोजगारपरक शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।