अंबिकापुर। स्कूली बच्चों को पढ़ने के अवसर प्रदान करता है ऐसी धारणा सभी के मन मे रहती है परन्तु कई ऐसे स्कूल भी है जो अच्छी पढ़ाई के साथ साथ सवार्गीण विकास हेतु प्रयासरत है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ वृहद किचन गार्डन विकसित कर बच्चों हेतु पौष्टिक सब्जी विद्यालय के आस पास की रिक्त भूमि का उपयोग कर उपजा रहे है जिसका उपयोग छात्र नियमित कर रहे है ।
ऐसा ही एक स्कूल विकासखंड प्रतापपुर का प्राथमिक शाला सारसताल सोनगरा है। यहां पदस्थ शिक्षक रंजय सिंह, ग्रामीणों, अभिभावकों एवं बच्चों के सहयोग से वृहद किचन गार्डन विकसित किए है जिसमे मौसमी सब्जी उपजाकर मध्यान्ह भोजन में उपयोग नियमित करते है। शिक्षक द्वारा अहाता नही होने के बाद भी बांस का अस्थाई घेरा बनाकर सब्जी एवं फलदार वृक्ष लगाए गए है। हैंडपंप के पास केला एवं पपीता लगाया गया है जो नीचे गिरे पानी से फलफूल रहा है जिसका उपयोग सभी बच्चे करते है। शिक्षक द्वारा बरसात के दिनों मे भी भिंडी, मक्का, बैगन, लौकी, कुम्हड़ा, मूली, लाल भाजी, पालक भाजी लगाया गया था जिसका उपयोग बच्चों हेतु किया गया। अभी वर्तमान में फूलगोभी, पत्तागोभी, मटर, भाटा, टमाटर, लहसुन, प्याज, मिर्च लगाया गया है जो फल देना आरंभ कर दिया है, इसका भी उपयोग छात्र कर रहे है। बिना किसी शासकीय सहयोग के शिक्षक रंजय सिंह के द्वारा अभिभावकों एवं बच्चों के सहयोग से स्कूल का कायाकल्प कर दिया गया है। अभी कोरोना के कारण विद्यालय बंद है फिर भी शिक्षक छात्र समय-समय पर उपस्थित होकर सब्जियों में पानी इत्यादि डालते है। पपीता एवं केला पकने पर सभी बच्चे शिक्षक मिलकर खाते है जो सभी के लिए अनुकरणीय है शिक्षक के विशेष प्रयास के कारण यह स्कूल जिले का उत्कृष्ट स्कूल है।
शिक्षक द्वारा स्कूल में भवन के आस पास सूरजमुखी का फूल भी लगाया गया है जो स्कूल की सुंदरता को और बढ़ा रहे है। सब्जी एवं फूल पौधों के लगने के कारण स्कूल परिसर की रौनक बढ़ गई है। सभी अभिभावक,शिक्षक एवं बच्चों का सहयोग शिक्षक को इस कार्य मे मिल रहा है जिससे शिक्षक को ऊर्जा मिलती है एवं स्वप्रेरणा से अच्छा कार्य कर अन्य स्कूल हेतु अनुकरणीय है। स्कूल के अच्छे कार्य की चर्चा लम्बे समय से है परन्तु अभी अहाता के साथ साथ अन्य सुविधा का अभाव है जिसकर वरिष्ट अधिकारियों को ध्यान देने की जरूरत है। शासकीय सहयोग मिलने से स्कूल और सुंदर बनाकर माडल रूप में विकसित किया जा सकता है । यह स्कूल क्षेत्र का इकलौता स्कूल है जहां पर सभी बच्चे एक साथ बैठकर भोजनमन्त्र के साथ मध्यान्ह भोजन करते है साथ ही सभी बच्चे प्रतिदिन अपने अभिभावकों का चरणस्पर्श कर विद्यालय आते है यहां अध्ययनरत सभी छात्र टाई-बेल्ट लगाकर आते है जो सिर्फ अशासकीय विद्यालय में देखने को मिलता है। यहां खेल-खेल में गीत, कविता एवं गतिविधियों से शिक्षण कराया जाता है जो शिक्षक के विशेष प्रयास से ही संभव हो सका है।