मुंबई । अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों के लिए स्थायी श्रमिक प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) पर रोक लगाए जाने के बाद टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने कहा है कि इस फैसले से उसकी कार्यबल रणनीति और ग्राहक सेवाओं पर कोई खास असर पड़ने की आशंका नहीं है। देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा निर्यातक कंपनी ने स्पष्ट किया कि पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एकल अंक में रहे हैं। ऐसे में इस कार्यक्रम के निलंबन से उसके परिचालन पर तत्काल प्रभाव पड़ने की उम्मीद नहीं है।
अमेरिका में 15 हजार कर्मचारियों की भर्ती करेगी TCS
टीसीएस ने कहा कि अमेरिका में उसकी भर्ती रणनीति स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार देने पर केंद्रित है। कंपनी कैंपस भर्ती के माध्यम से भी कर्मचारियों को जोड़ रही है। टीसीएस ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका में 15 हजार अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती करने की अपनी योजना दोहराई है।
कंपनी के अनुसार, वह अमेरिकी श्रम विभाग के निर्देशों का पालन करेगी और स्थानीय स्तर पर प्रतिभाशाली कर्मचारियों की भर्ती जारी रखेगी।
आठ कंपनियों पर अमेरिकी प्रशासन की कार्रवाई
अमेरिकी प्रशासन ने 8 अक्टूबर को आठ प्रमुख प्रौद्योगिकी कंपनियों के लिए PERM कार्यक्रम में भागीदारी निलंबित करने की घोषणा की। इस कार्रवाई में भारतीय कंपनियों टीसीएस, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के अलावा कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और फ्रांसीसी कंपनी कैपजेमिनी शामिल हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने इस फैसले की जानकारी दी। प्रशासन ने विदेशी कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ी प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर चिंता जताई है। मामले में जांच जारी है।
क्या है PERM कार्यक्रम?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है। इसके तहत नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि विदेशी कर्मचारी को स्थायी रोजगार देने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन, कामकाजी परिस्थितियों या रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इस कार्यक्रम पर रोक का मतलब यह नहीं है कि सभी भारतीय कर्मचारियों के वीजा रद्द कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई संबंधित कंपनियों के PERM आवेदनों को प्रभावित करती है। मौजूदा एच-1बी वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड इस फैसले से अपने आप रद्द नहीं होते। हालांकि, जिन कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया लंबित है, उन्हें देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।
भारतीय आईटी सेक्टर पर क्या होगा असर?
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, विश्लेषकों को भारतीय आईटी कंपनियों के राजस्व पर तत्काल बड़े प्रभाव की आशंका कम है, क्योंकि इन कंपनियों ने अमेरिका में स्थानीय भर्ती बढ़ाई है और एच-1बी वीजा पर निर्भरता घटाई है। हालांकि, लंबे समय तक ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में अनिश्चितता रहने से कर्मचारियों को बनाए रखने और भर्ती की लागत बढ़ने जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।
उद्योग संगठन नैसकॉम ने भी कहा है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका में स्थानीय कार्यबल बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं।
टीसीएस के बयान से संकेत मिलता है कि कंपनी अमेरिकी बाजार में अपनी भर्ती और ग्राहक सेवाओं को जारी रखने के लिए स्थानीय प्रतिभाओं पर भरोसा बनाए हुए है। हालांकि, PERM कार्यक्रम पर रोक कितने समय तक रहेगी और लंबित मामलों का भविष्य क्या होगा, इस पर आगे की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।