शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन आज, मां स्कंदमाता की पूजा से मिलेगी सुख-समृद्धि की कामना; जानें शुभ मुहूर्त, मंत्र और पूजा विधि

नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पांचवां दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना करने से जीवन में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि आती है। भक्त ज्ञान, बुद्धि, साहस और संतान सुख की कामना के साथ माता की आराधना करते हैं। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर मंदिरों और घरों में विधि-विधान से पूजा की जाती है।

मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता के रूप में पूजा जाता है। उनका स्वरूप ममता, शक्ति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। आइए जानते हैं मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व, पूजा विधि, मंत्र और प्रिय भोग के बारे में।

मां स्कंदमाता पूजा 2026: शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि की पंचमी तिथि 15 अक्टूबर 2026 को रात 1 बजकर 14 मिनट से प्रारंभ होकर 16 अक्टूबर को रात 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगी।

  • पंचमी तिथि प्रारंभ: 15 अक्टूबर, रात 1:14 बजे
  • पंचमी तिथि समाप्त: 16 अक्टूबर, रात 3:26 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:51 बजे से 5:39 बजे तक
  • अमृत काल: रात 8:58 बजे से 10:45 बजे तक

नोट: मुहूर्त स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। पूजा से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग से समय की पुष्टि कर लें।

कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप?

मां स्कंदमाता को माता पार्वती का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक चित्रण में वे अपने पुत्र भगवान स्कंद यानी कार्तिकेय को गोद में लेकर कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।

माता की चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित रहते हैं, एक हाथ में बाल स्वरूप भगवान स्कंद विराजमान होते हैं और दूसरे हाथ से वे भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करती हैं। उनका शांत और दिव्य स्वरूप ममता, धैर्य, साहस तथा मातृत्व का संदेश देता है।

मां स्कंदमाता की पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब राक्षसों का अत्याचार बढ़ने लगा, तब देवताओं की रक्षा के लिए भगवान कार्तिकेय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे देवताओं की सेना के सेनापति बने और दुष्ट शक्तियों के विरुद्ध युद्ध किया।

भगवान स्कंद की माता होने के कारण माता पार्वती को स्कंदमाता कहा गया। उनका यह स्वरूप मातृत्व और शक्ति के अद्भुत संगम का प्रतीक है। धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों को माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मां स्कंदमाता के प्रभावशाली मंत्र

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप श्रद्धापूर्वक किया जा सकता है।

1. बीज मंत्र

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः।

2. सामान्य पूजा मंत्र

ॐ देवी स्कंदमातायै नमः।

3. प्रार्थना मंत्र

या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मंत्र जाप करते समय मन को शांत रखें और माता का ध्यान करें। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

मां स्कंदमाता को क्या भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा पीले रंग की मिठाइयां और अन्य सात्विक पकवान भी माता को चढ़ाए जा सकते हैं।

भोग तैयार करते समय स्वच्छता का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य श्रद्धालुओं में बांटा जा सकता है।

मां स्कंदमाता की पूजा विधि

नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा के लिए इन सरल चरणों का पालन किया जा सकता है।

  1. सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थल की साफ-सफाई कर मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
  3. माता को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें।
  4. केले या अन्य सात्विक पकवान का भोग लगाएं।
  5. मां स्कंदमाता के मंत्रों का जाप करें और दुर्गा माता की आरती करें।
  6. अंत में परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और सभी के कल्याण की प्रार्थना करें।

मां स्कंदमाता की पूजा का क्या है धार्मिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना से भक्तों को मानसिक शांति, साहस और सकारात्मकता की प्रेरणा मिलती है। माता का स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य, ममता और आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए।

नवरात्रि का पांचवां दिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का अवसर है। इस दिन मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना के साथ परिवार, समाज और सभी के कल्याण की कामना की जाती है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *