रायपुर | रायगढ़ में आयोजित प्रतिष्ठित 41वें चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या बेहद खास और आध्यात्मिक रंग में डूबी रही। इस संध्या में प्रसिद्ध पद्मश्री डॉ. भारती बंधु ने अपनी सुरीली आवाज में सूफी संगीत, कबीर वाणी और लोकप्रिय भक्ति गीतों की शानदार प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
भक्ति और सूफी गीतों से सजा मंच
कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना के साथ हुई। इसके बाद डॉ. भारती बंधु और उनके साथियों ने ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’ और संत कबीर के प्रसिद्ध भजन ‘राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट’ जैसे गीतों की ऐसी समां बांधी कि पूरा दर्शक दीर्घा झूम उठा। इस दौरान श्रोताओं ने लगातार तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कबीर के दोहों और सूफी रचनाओं का अनूठा संगम
पद्मश्री भारती बंधु ने कबीर के दोहों और पदों को अपनी बेहद विशिष्ट और पारंपरिक शैली में पेश किया। इस दौरान उन्होंने:
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‘कबीरा बिगड़ गयो राम दुहाई’
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‘छाप तिलक सब छीनी मोसे नैना मिलाई के’
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‘मेरा पिया घर आया, ओ राम जी’
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‘श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी’
जैसे लोकप्रिय गीतों और कलामों की प्रस्तुति दी। इन विविध रचनाओं के जरिए सांस्कृतिक संध्या में कबीर वाणी, सूफी संगीत और भक्ति धाराओं का एक सुंदर संगम देखने को मिला।
संगीत की पांचवीं पीढ़ी निभा रही है परंपरा
प्रस्तुति के दौरान डॉ. भारती बंधु ने चक्रधर समारोह के साथ अपने पुराने और गहरे जुड़ाव को साझा किया। उन्होंने बताया कि वे इस समारोह को इसके शुरुआती दौर से जानते हैं और समय के साथ इसका दायरा और स्वरूप काफी विस्तृत हुआ है, जिसमें शामिल होना उनके लिए गौरव की बात है।
अपने पारिवारिक सफर के बारे में बताते हुए 67 वर्षीय कलाकार ने साझा किया कि वे अपने परिवार में भक्ति संगीत की पांचवीं पीढ़ी से ताल्लुक रखते हैं, जबकि उनके पुत्र इस समृद्ध परंपरा को छठी पीढ़ी के रूप में आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वे पिछले 57 वर्षों से लगातार गायन कर रहे हैं और अपनी कला के जरिए संगीत की अलख जगा रहे हैं।