हर 40 किलो की बोरी में 500 ग्राम से 1 किलो धान ज्यादा
कवर्धा– एक ओर जहां किसान 2500 रुपए प्रति क्विंटल धान की कीमत होने से खुश नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उनसे तौल में उपार्जन केंद्र में सूखती के नाम से अधिक धान ले रहे हैं। प्रति बोरे में किसानों से 5 सौ ग्राम से लेकर 2 किलो अतिरिक्त धान लिया जा रहा है। मामले में प्रशासन स्तर पर कार्रवाई नहीं किए जाने से किसान उपार्जन केंद्रों में ठगी का शिकार हो रहे हैं। सोमवार को सहसपुर लोहारा ब्लॉक के सूरजपुरा धान खरीदी केंद्र में धान के अधिक तौल का मामला प्रकाश में आया। किसानों द्वारा हंगामा करने पर मौके पर नोडल अधिकारी को पहुंचना पड़ा। जांच के दौरान गड़बड़ी भी पाई गई, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। धान के तौलने में गड़बड़ी पर गुरुवार को दैनन्दिनी की टीम ने लोहारा ब्लॉक के सूरजपुरा सहित अन्य धान खरीदी केंद्रों का अवलोकन किया गया।
500 से 2 किलो अधिक की तौलाई
उपार्जन केंद्र सूरजपुरा में 500 ग्राम से लेकर 2 किलो ग्राम अधिक तौल करते हुए पाया गया। शासन के नियमानुसार एक बारदाने में 40 किलो धान भरा जा सकता है। उसमें बारदाने के वजन के बदले एक बारदाना रखा जाता है या फिर जुट के बोरी 600 ग्राम, और प्लास्टिक बोरी में 130 ग्राम लेकिन समिति प्रबंधक 2 किलो तक प्रति बोरी एक्स्ट्रा धान भर रहे हैं। किसान आपत्ति करे तो कह दिया जाता है कि परिवहन समय पर नहीं होने से धान फड़ में पड़े रहने से सूखता है। जिसके बाद एक बोरे का वजन 40 किलो से कम हो जाता है। प्रबंधकों के पास नमी जांचने के लिए मशीन शासन ने दी है। किसानों को समिति प्रबंधक ही रबी व खरीफ दोनों सीजन में खाद्य बीज उपलब्ध कराते हैं। अधिक धान लेने की शिकायतें व आपत्ति करें तो उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रबंधक के पिता करते हैं धान की चोरी
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमे उपार्जन केंद्र में धान खरीदी के बाद , सिलाई के पहले खरीदी केंद्र के प्रभारी के पिता ने प्रति बोरी से एक से दो किलो धान को निकाल रहा था जिसकी जांच करने गए नोडल अधिकारी ने वायरल वीडियो को सही पाया गया ।
मंत्री जी के नाम का दुरूपयोग
कद्दावर मंत्री व कबर्धा विधायक मोहम्मद अकबर के नाम को कुछ छुटभैये नेता लोग बदनाम करते हुए खरीदी केंद्र के प्रबंधक के ऊपर कार्यवाही नही की अधिकारी के ऊपर दबाव बना रहे हैं । ऐसा नेता जिनका मंत्री के साथ कोई वास्ता ही नही है।
एक्स्ट्रा धान पर ऐसे खेलते हैं खेल
धान का तौल होते ही सिलाई करना होता है, लेकिन समिति प्रबंधक तत्काल बोरी की सिलाई नहीं कराते। खरीदी के समय तौल में समिति प्रबंधक किसानों से जो अतिरिक्त धान लेते हैं उस एक्स्ट्रा धान को निकालने के बाद सिलाई करते हैं। फिर निकाले गए धान को उन किसानों के नाम से खपाया जाता है जिनके पास कृषि जमीन तो होती है साथ ही उनका भी पंजीयन भी होता है, लेकिन वे धान का उत्पादन नहीं करते हैं।