भारतीय सेना को मिलेंगे 770 करोड़ के आधुनिक रडार, लड़ाकू विमान से लेकर छोटे ड्रोन तक पर रखेंगे नजर

नई दिल्ली । भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ लगभग 770 करोड़ रुपये का करार किया है। इस समझौते के तहत सेना के लिए उन्नत कम ऊंचाई वाले हल्के रडार (Improved Low Level Light Weight Radar-LLLR-I) खरीदे जाएंगे। ये रडार लड़ाकू विमानों के साथ-साथ छोटे और बेहद छोटे ड्रोन का भी पता लगाने तथा उनकी गतिविधियों को ट्रैक करने में सक्षम होंगे।

रक्षा मंत्रालय ने 21 अक्टूबर को नई दिल्ली में रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में इस करार पर हस्ताक्षर किए। मंत्रालय के अनुसार, इन आधुनिक रडार प्रणालियों से भारतीय सेना को मानवरहित हवाई प्रणालियों (UAS) से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने में मदद मिलेगी।

छोटे ड्रोन की पहचान करने में भी सक्षम होंगे रडार

आधुनिक युद्धक्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हवाई लक्ष्यों की निगरानी और समय रहते उनकी पहचान करना महत्वपूर्ण है।

LLLR-I रडार प्रणाली लड़ाकू विमान के आकार वाले हवाई लक्ष्यों के साथ मिनी और माइक्रो ड्रोन का भी पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने की क्षमता रखती है। इसकी एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता हवाई लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर वर्गीकृत करना है। इससे सेना को संभावित खतरों का आकलन करने और उनके अनुरूप कार्रवाई की तैयारी करने में सहायता मिलेगी।

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि इन रडारों की खरीद से भारतीय सेना की हवाई रक्षा व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और मानवरहित हवाई प्रणालियों से पैदा होने वाले खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।

स्वदेशी रक्षा निर्माण को मिलेगा प्रोत्साहन

इस करार का उद्देश्य केवल सेना की परिचालन क्षमता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को भी प्रोत्साहित करना है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के माध्यम से रडारों की खरीद से घरेलू रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को समर्थन मिलने की उम्मीद है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस पहल से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को भी लाभ मिलने की संभावना है। रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करने और विदेशी स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को गति मिलेगी।

यह खरीद सरकार के आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप है। इसका उद्देश्य देश में एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी रक्षा उद्योग विकसित करना है।

हवाई सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

ड्रोन और अन्य मानवरहित हवाई प्रणालियों के बढ़ते इस्तेमाल के बीच निगरानी एवं पहचान प्रणालियों का आधुनिकीकरण रक्षा तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। LLLR-I रडारों की खरीद से भारतीय सेना को विभिन्न हवाई लक्ष्यों की पहचान और उनकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।

लगभग 770 करोड़ रुपये का यह करार भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ स्वदेशी रक्षा तकनीक और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

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