बस्तर के लोहागांव की बदलेगी तस्वीर, 7 किमी सड़क से 11 घंटे का सफर सिमटकर होगा एक घंटा

किरंदुल। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग की दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे लोहागांव के ग्रामीणों के लिए राहत भरी खबर है। गांव को बेहतर सड़क संपर्क से जोड़ने के लिए 7 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस सड़क के तैयार होने से किरंदुल तक पहुंचने में लगने वाला करीब 11 घंटे का पैदल सफर वाहन से लगभग एक घंटे में पूरा किया जा सकेगा। वहीं, मौजूदा सड़क नेटवर्क तक पहुंचने में लगने वाले करीब तीन घंटे के पैदल सफर को मोटरसाइकिल से लगभग 15 मिनट में तय करने की उम्मीद है।

इस परियोजना का निर्माण छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के सहयोग से किया जा रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण लंबे समय से सड़क संपर्क से दूर रहे इस क्षेत्र के लिए इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

7 किलोमीटर सड़क का निर्माण जारी, 2.5 किमी काम पूरा

प्रस्तावित सड़क सीधे लोहागांव से किरंदुल तक नहीं जाएगी। इसके बजाय यह लोहागांव को डिपॉजिट-11सी कार्यालय से जोड़ेगी और आगे पुरंगल में पहले से मौजूद सड़क नेटवर्क तक पहुंच उपलब्ध कराएगी। वहां से सड़क मार्ग के जरिए किरंदुल और राज्य राजमार्ग तक पहुंचना संभव होगा।

परियोजना के तहत कुल 7 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लगभग 2.5 किलोमीटर सड़क का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष 4.5 किलोमीटर का निर्माण अभी बाकी है।

सड़क तैयार होने के बाद ग्रामीणों को दुर्गम पहाड़ी रास्तों और घने जंगलों से होकर लंबी पैदल यात्रा करने की मजबूरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

पांच से अधिक गांवों को मिलेगा बेहतर संपर्क

इस सड़क का लाभ केवल लोहागांव तक सीमित नहीं रहेगा। दंतेवाड़ा और पड़ोसी बीजापुर जिले के आसपास के दूरस्थ गांवों को भी बेहतर संपर्क मिलने की संभावना है। इनमें एंड्री, तमोदी, पुरंगल, गामपुर और बेंगपाल जैसे गांव शामिल हैं।

वर्तमान में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए खड़ी चढ़ाई, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और घने जंगलों से होकर गुजरना पड़ता है। सड़क संपर्क बेहतर होने से बाजारों, स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।

मेडिकल इमरजेंसी में मिलेगी बड़ी राहत

दुर्गम क्षेत्रों में सड़क की कमी का सबसे ज्यादा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। किसी व्यक्ति के बीमार होने या दुर्घटना की स्थिति में उसे अस्पताल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

छत्तीसगढ़ सरकार के ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर’ अभियान के तहत हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी एक टीम ने बैलाडीला की पहाड़ियों और जंगलों से होकर लोहागांव पहुंचकर ग्रामीणों का उपचार किया था। इस दौरान गांव की दुर्गम स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयां सामने आई थीं।

ऐसे में सड़क बनने से स्वास्थ्य कर्मियों की आवाजाही आसान होने और आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

वन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना होगा आसान

लोहागांव और आसपास के गांवों के ग्रामीणों की आजीविका काफी हद तक स्थानीय संसाधनों और वन उत्पादों पर निर्भर है। वर्तमान में कठिन रास्तों के कारण बाजार तक सामान पहुंचाने और दैनिक जरूरतों की वस्तुएं गांव तक लाने में काफी समय और मेहनत लगती है।

नई सड़क से वन उत्पादों को बाजार तक पहुंचाना आसान हो सकता है। साथ ही ग्रामीणों को घरेलू जरूरतों का सामान लाने, शिक्षा संबंधी सुविधाओं तक पहुंचने और अन्य दैनिक कार्यों के लिए भी सहूलियत मिलने की संभावना है।

वन भूमि से गुजरने के कारण जरूरी प्रक्रियाएं

परियोजना का मार्ग वन भूमि से होकर गुजरता है। इसलिए सड़क निर्माण में वन विभाग से संबंधित आवश्यक अनुमतियों और प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है। वन विभाग और एनसीएल के सहयोग से आगे बढ़ रही यह परियोजना क्षेत्र के दूरस्थ गांवों को मौजूदा परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सड़क से बदलेगी ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी

लोहागांव के लिए इस परियोजना का सबसे बड़ा महत्व यात्रा के समय में संभावित कमी है। जिस दूरी को तय करने में ग्रामीणों को घंटों पैदल चलना पड़ता है, वह सड़क संपर्क विकसित होने के बाद काफी कम समय में पूरी हो सकेगी।

हालांकि, सड़क का शेष निर्माण कार्य पूरा होने और मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने के बाद ही इसके वास्तविक लाभ स्पष्ट होंगे। इसके बावजूद, परियोजना से बस्तर के दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसरों तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।

लोहागांव को डिपॉजिट-11सी क्षेत्र और पुरंगल के मौजूदा सड़क नेटवर्क से जोड़ने की यह पहल बस्तर के दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा की सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *