रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद सत्तारूढ़ इंडिया ब्लॉक के भीतर राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। हालांकि अब कांग्रेस ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश करते हुए सहयोगी दलों से संयम बरतने और गठबंधन की एकता बनाए रखने की अपील की है।
कांग्रेस नेताओं की ओर से अपने ही गठबंधन के विधायकों पर क्रॉस वोटिंग के आरोप लगाए गए थे, जिसे भाकपा माले (लिबरेशन) ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से हस्तक्षेप की मांग करते हुए आरोपों को दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन बताया।
झारखंड राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच नाराजगी बढ़ गई है। कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, भाकपा माले और झारखंड मुक्ति मोर्चा के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, झारखंड में गठबंधन के पास दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बल था। शुरुआती दौर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोनों सीटें जेएमएम के खाते में रखना चाहते थे, लेकिन बाद में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे के आग्रह पर एक सीट कांग्रेस को दी गई।
चुनाव परिणाम के बाद गठबंधन में चर्चा तेज हो गई कि कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। बताया जा रहा है कि कांग्रेस उम्मीदवार को उम्मीद के मुताबिक समर्थन नहीं मिला, जबकि एनडीए समर्थित उम्मीदवार को अतिरिक्त वोट मिले और उन्होंने जीत दर्ज की।
कांग्रेस की नाराजगी की एक वजह यह भी बताई जा रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चुनाव परिणाम के बाद विजयी उम्मीदवार को बधाई दी, लेकिन गठबंधन उम्मीदवार की हार पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
हालांकि शुरुआती तल्ख बयानबाजी के बाद अब इंडिया ब्लॉक के नेता नुकसान को कम करने और विपक्षी एकता बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं। नेताओं को डर है कि आपसी विवाद का फायदा विरोधी दलों को मिल सकता है।