नई दिल्ली | तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा को विवादित फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। अदालत ने जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट देने की उनकी मांग खारिज कर दी और इस दौरान कड़ी टिप्पणी भी की।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि राजनीति में रहने वाले व्यक्ति को इस तरह के आधार पर व्यक्तिगत पेशी से छूट नहीं दी जा सकती।
अदालत की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि पिछली बार अपने संसदीय क्षेत्र के पुलिस थाने जाने पर उनके ऊपर अंडे फेंके गए थे। इसी कारण उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जांच में शामिल होने की अनुमति दी जाए।
इस पर अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “आप एक सांसद हैं। राजनीति में होकर अंडों से डरती हैं? हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो सीने पर गोलियां खाई थीं।” अदालत ने यह भी कहा कि इस प्रकार की याचिकाएं न्यायालय के समक्ष नहीं आनी चाहिए।
हाई कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
यह मामला धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप से जुड़ा है। इससे पहले 21 जुलाई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी, लेकिन उन्हें जांच में पूरा सहयोग करने और 14 अगस्त को जांच अधिकारी के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।
महुआ मोइत्रा ने हाई कोर्ट के इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट की मांग की थी।
राहत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की मांग स्वीकार नहीं की और स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का पर्याप्त आधार इस मामले में नहीं बनता। अदालत की टिप्पणी और आदेश के बाद महुआ मोइत्रा को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच में सहयोग करना होगा।