वारसॉ । पोलैंड में संवैधानिक न्यायालय के नियंत्रण को लेकर राजनीतिक और न्यायिक संकट गहरा गया है। न्यायालय में रातभर चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद शनिवार को अदालत परिसर के बाहर दंगा-रोधी पुलिस तैनात कर दी गई। वहीं, राष्ट्रपति कैरोल नावरोत्स्की ने अपनी विदेश यात्रा बीच में छोड़कर स्वदेश वापसी की है।
यह विवाद प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार और पूर्ववर्ती दक्षिणपंथी लॉ एंड जस्टिस (पीआईएस) पार्टी के बीच न्यायपालिका को लेकर लंबे समय से जारी राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है।
शुक्रवार शाम पोलैंड के संवैधानिक न्यायाधिकरण (टीके) में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सरकार समर्थित न्यायाधीशों के एक समूह ने मुख्य न्यायाधीश से अदालत का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने देश की न्यायिक व्यवस्था और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तनाव को और बढ़ा दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दंगा-रोधी पुलिस की तैनाती के बीच प्रशासन किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सतर्क है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में न्यायालय की वैधता, न्यायाधीशों की नियुक्ति और संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण का सवाल है। प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार न्यायपालिका में बदलाव की पक्षधर रही है, जबकि पीआईएस के समर्थक इन कदमों का विरोध करते रहे हैं।
राष्ट्रपति कैरोल नावरोत्स्की की विदेश यात्रा बीच में छोड़कर वापसी को भी इस घटनाक्रम के राजनीतिक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।
पोलैंड में बढ़ते इस संवैधानिक विवाद ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। आने वाले दिनों में सरकार और राष्ट्रपति के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।