तमिलनाडु में नई सरकार को स्टालिन का समर्थन, संवैधानिक संकट से बचाने का ऐलान

चेन्नई। तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक रस्साकसी का माहौल देखने को मिल रहा है। बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने में जुटे टीवीके प्रमुख थलपति विजय को रोकने के लिए द्रविड़ राजनीति में एक-दूसरे के धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके के हाथ मिलाने की अटकलें लग रही थीं। इसी बीच,  डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन  ने ऐलान किया कि वे नई टीवीके सरकार को छह महीने तक कोई दखल नहीं देंगे।

स्टालिन का बड़ा बयान:
एमके स्टालिन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता तमिलनाडु में संवैधानिक संकट से बचना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार राज्य में चल रही जनहित योजनाओं को बिना रुके जारी रखेगी । स्टालिन ने अपने बयान में यह भी साफ किया कि उनका यह कदम  थलपति विजय के लिए बड़ी खुशखबरी  है।

टीवी के और कांग्रेस का बहुमत दावा:
हाल ही में टीवीके ने  कांग्रेस के समर्थन से बहुमत का दावा किया था, जबकि एआईएडीएमके ने अपने विधायकों को  पुडुचेरी शिफ्ट कर दिया था। राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता संघर्ष के बीच स्थिरता बनाए रखने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं।

पूर्व घोषणापत्र और वादे:
स्टालिन ने अपने इंटरव्यू में बताया कि  डीएमके सरकार ने 2021 के घोषणापत्र में किए गए 90% वादे पूरे  किए हैं। कुछ वादे जैसे  NEET को बंद करने का वादा केंद्र सरकार के नियंत्रण के कारण पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि चुनाव में डीएमके ने केवल उन्हीं वादों का दावा किया है जिन्हें पूरा किया जा सकता है और संदेह जताया कि टीवीके पार्टी अपने सभी वादे पूरे कर पाएगी।

राजनीतिक स्थिरता की दिशा में कदम:
स्टालिन के बयान ने डीएमके और एआईएडीएमके के गठबंधन की अटकलों पर विराम लगा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम तमिलनाडु में  लोकतांत्रिक परिपक्वता और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखने की दिशा में अहम साबित होगा।

चुनावी परिणाम:
हाल ही में संपन्न तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में पहली बार मैदान में उतरी टीवीके पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। हालांकि, सरकार बनाने के लिए बहुमत यानी 118 सीटों की जरूरत  है, जिससे सत्ता गठन की कवायद अब भी जारी है।

 

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