7.8% GDP ग्रोथ पर शंकर शर्मा का बड़ा सवाल, बोले- कागजों पर तेज रफ्तार, जमीन पर ‘रियल फील’ सिर्फ 2-3%

नई दिल्ली। भारत की 7.8% तिमाही GDP ग्रोथ को लेकर बहस तेज हो गई है। अब शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक शंकर शर्मा ने भी आर्थिक विकास के आंकड़ों और आम लोगों की जमीनी स्थिति के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि GDP के आंकड़े भले ही मजबूत नजर आ रहे हों, लेकिन इसका असर आम नागरिकों की जिंदगी में उसी अनुपात में महसूस नहीं हो रहा।

‘रियल फील’ पर शंकर शर्मा ने उठाए सवाल

शंकर शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि उन्हें GDP के आंकड़ों की बहस में ज्यादा दिलचस्पी नहीं है। उनका मुख्य सवाल यह है कि आर्थिक विकास का ‘Real Feel’ आम लोगों को कितना हो रहा है।

उन्होंने कहा कि कागजों पर भारत करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है और 7% से ज्यादा की रफ्तार से बढ़ रहा है, लेकिन आम लोगों को इसकी वास्तविक ग्रोथ महज 2-3% जैसी महसूस होती है।

ट्रैफिक और तनाव को लेकर भी चिंता

शंकर शर्मा ने भारत में Quality of Life को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक शहरों में ट्रैफिक, अव्यवस्था और तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि देश के कई शहर और गांव अभी भी उस स्तर की आर्थिक समृद्धि नहीं दिखाते, जिसकी उम्मीद करीब 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से की जा सकती है।

यूरोप से की भारत की तुलना

शंकर शर्मा ने भारत की तुलना यूरोप से करते हुए कहा कि वहां GDP ग्रोथ भले ही 2-3% के आसपास हो, लेकिन लोगों को आर्थिक समृद्धि का ‘रियल फील’ ज्यादा दिखाई देता है। साफ-सफाई, बेहतर शहरी व्यवस्था, खुशहाल माहौल और कैफे-रेस्टोरेंट की रौनक जैसी चीजों को उन्होंने जीवन की गुणवत्ता से जोड़ा।

हालांकि, GDP और Quality of Life अलग-अलग आर्थिक पैमाने हैं। इसलिए ‘Real Feel GDP’ को आधिकारिक GDP का विकल्प नहीं माना जा सकता। बावजूद इसके, शंकर शर्मा की टिप्पणी ने भारत की तेज आर्थिक वृद्धि और उसके आम लोगों तक पहुंचने वाले वास्तविक लाभ को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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