रूस की 2035 तक चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने की योजना, रोसाटॉम ने किया ऐलान

मॉस्को |  रूस ने चंद्रमा पर अपनी अंतरिक्ष उपस्थिति को मजबूत करने की दिशा में बड़ी योजना का ऐलान किया है। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एलेक्सी लिखाचेव के अनुसार, रूस का लक्ष्य वर्ष 2035 तक चंद्रमा पर अपना पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना है। इस परियोजना का उद्देश्य चंद्रमा पर भविष्य में बनने वाले अंतरिक्ष स्टेशन को ऊर्जा उपलब्ध कराना है।

शुक्रवार को मॉस्को में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को संबोधित करते हुए लिखाचेव ने कहा कि रूस अगले दशक के मध्य तक चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा इकाई स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे चंद्रमा पर दीर्घकालिक वैज्ञानिक गतिविधियों और अंतरिक्ष स्टेशन के संचालन के लिए ऊर्जा की व्यवस्था करने में मदद मिल सकती है।

रोसाटॉम और कुरचातोव इंस्टीट्यूट मिलकर कर रहे काम

इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर रोसाटॉम और रूस के कुरचातोव इंस्टीट्यूट रिसर्च सेंटर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस भी चंद्रमा पर दीर्घकालिक वैज्ञानिक स्टेशन विकसित करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। दिसंबर 2025 में रूस ने चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा आधारित बिजली स्टेशन बनाने की योजना की घोषणा की थी, जिसके लिए उस समय 2036 तक की समयसीमा बताई गई थी।

चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा की जरूरत क्यों?

चंद्रमा पर लंबे समय तक वैज्ञानिक मिशन चलाने के लिए निरंतर और भरोसेमंद ऊर्जा आपूर्ति जरूरी होगी। परमाणु ऊर्जा संयंत्र से भविष्य में इन गतिविधियों को बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है:

  • चंद्रमा पर स्थापित वैज्ञानिक स्टेशन का संचालन।

  • चंद्र रोवर और अन्य खोजी उपकरणों को ऊर्जा देना।

  • वैज्ञानिक प्रयोगों और संभावित दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों के लिए बिजली उपलब्ध कराना।

  • चंद्रमा पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में बुनियादी ढांचे का विकास।

रूस की पहले घोषित योजना में चंद्रमा पर वैज्ञानिक स्टेशन, रोवर और अन्य अंतरिक्ष संबंधी बुनियादी ढांचे को ऊर्जा देने की परिकल्पना शामिल रही है।

अंतरिक्ष में बढ़ रही वैश्विक प्रतिस्पर्धा

चंद्रमा पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की रूस की योजना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियां चंद्रमा पर लंबे समय तक वैज्ञानिक अनुसंधान और बुनियादी ढांचे के विकास की तैयारी कर रही हैं। रूस की यह परियोजना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगी, क्योंकि चंद्रमा पर उपकरण पहुंचाने, उन्हें स्थापित करने और कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों में संचालित करने के लिए विशेष तकनीक की आवश्यकता होगी।

फिलहाल 2035 का लक्ष्य एक घोषित योजना है, पूर्ण हो चुकी परियोजना नहीं। इसकी वास्तविक प्रगति आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास, वित्तपोषण और अंतरिक्ष मिशनों की सफलता पर निर्भर करेगी।

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