नई दिल्ली। ट्रेनों में यात्रियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और पैंट्री कारों की स्वच्छता को लेकर रेलवे ने बड़ी जानकारी दी है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्यसभा में कांग्रेस सांसद चंद्रकांत हांडोरे के सवाल के जवाब में बताया कि पिछले तीन वर्षों में खराब भोजन और अस्वच्छ कैटरिंग सेवाओं से जुड़ी शिकायतों की जांच के बाद सेवा प्रदाताओं पर 5.13 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
कांग्रेस सांसद चंद्रकांत हांडोरे ने राज्यसभा में प्रीमियम और एक्सप्रेस ट्रेनों में भोजन की गुणवत्ता, पैंट्री कारों की साफ-सफाई और आतिथ्य सेवाओं में कमियों को लेकर राज्यवार और जोनवार शिकायतों की जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में रेल मंत्री ने यह आंकड़े साझा किए।
हर साल परोसे जाते हैं करीब 58 करोड़ भोजन
रेल मंत्री ने बताया कि भारतीय रेलवे प्रतिवर्ष औसतन करीब 58 करोड़ भोजन यात्रियों को उपलब्ध कराता है। इनमें शिकायतों की संख्या बेहद कम है। कुल भोजन की तुलना में औसतन केवल 0.0008 प्रतिशत शिकायतें प्राप्त होती हैं। हालांकि, रेलवे हर शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उसकी जांच करता है।
54 कारण बताओ नोटिस, 6 कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट रद्द
रेल मंत्री ने बताया कि भोजन की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर रेलवे ने कैटरिंग सेवा प्रदाताओं के खिलाफ कार्रवाई की है। इस दौरान 54 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले 6 कैटरिंग कॉन्ट्रैक्ट रद्द किए गए।
मील पैकेट पर मिलेगा QR Code
रेलवे यात्रियों को भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता उपलब्ध कराने के लिए नई व्यवस्था लागू करने जा रहा है। अब ट्रेन में मिलने वाले हर मील पैकेट पर QR Code दिया जाएगा। इसके माध्यम से यात्री भोजन की पैकिंग तारीख, FSSAI लाइसेंस और विक्रेता से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
CCTV से होगी किचन की निगरानी
रेलवे ने बताया कि यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर भोजन उपलब्ध कराने के लिए किचन में CCTV निगरानी की व्यवस्था की गई है। इसके जरिए भोजन तैयार करने की प्रक्रिया, कर्मचारियों की स्वच्छता, साफ कपड़े और दस्ताने जैसी व्यवस्थाओं पर नजर रखी जाती है।
इसके अलावा खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की निगरानी और स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट के माध्यम से भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है।
रेलवे का कहना है कि यात्रियों को बेहतर खान-पान सुविधा देने और शिकायतों को कम करने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।