नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच शनिवार को जुबानी वार-पलटवार देखने को मिला। राहुल गांधी ने महिला आरक्षण कानून को परिसीमन से जोड़ने पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे बिना किसी शर्त के लागू किया जाना चाहिए और उनका पूर्ण समर्थन रहेगा।
दरअसल, राहुल गांधी ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें उन्होंने महिलाओं की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और राजनीतिक भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि जब तक महिलाएं अपनी क्षमता और विचारों को पूरी तरह व्यक्त नहीं कर पातीं, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा।
राहुल गांधी के इस वीडियो को री-पोस्ट करते हुए किरण रिजिजू ने कहा कि महिलाओं को लेकर राहुल गांधी के विचारों में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस महिला आरक्षण विधेयक का बिना किसी शर्त के समर्थन करेगी।
राहुल गांधी ने किया पलटवार
रिजिजू के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने उनके पोस्ट को री-पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक 2023 में ही संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है और कांग्रेस ने इसका पूर्ण समर्थन किया था।
राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि कानून पारित होने के बाद भी इसे लागू क्यों नहीं किया गया और अब इसे परिसीमन से क्यों जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2023 के कानून को लागू किया जाए और उनका समर्थन बिना किसी शर्त के रहेगा।
क्या है महिला आरक्षण कानून?
2023 में पारित संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए करीब एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। मूल संवैधानिक व्यवस्था में इसके क्रियान्वयन को जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था।
यही प्रावधान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। राहुल गांधी जहां इसे जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार की ओर से कानून के प्रावधानों और परिसीमन प्रक्रिया के बीच संबंध का मुद्दा सामने रखा जा रहा है।
संसद में गतिरोध के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
महिला आरक्षण के मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच बयानबाजी ऐसे समय हुई है जब संसद में विभिन्न मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिरोध जारी है। हाल के दिनों में रिजिजू और राहुल गांधी के बीच मुलाकात भी हुई है और करीब 10 दिनों के भीतर दोनों नेताओं की दो बार मुलाकात होने की बात सामने आई है।
महिला आरक्षण को लेकर ताजा बयानबाजी ने एक बार फिर 2023 में पारित कानून के क्रियान्वयन, परिसीमन और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है।