वॉशिंगटन। अमेरिका में संघीय सरकारी नौकरियों के आवेदकों से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को आगे बढ़ाने से जुड़े सवाल पूछने की व्यवस्था को बड़ा झटका लगा है। मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने ट्रंप प्रशासन को नौकरी के आवेदन में इस्तेमाल किए जा रहे तथाकथित ‘लॉयल्टी क्वेश्चन’ पर रोक लगा दी है।
यह सवाल ट्रंप प्रशासन की भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया गया था। आवेदकों से पूछा जाता था कि वे राष्ट्रपति की नीतियों को किस तरह आगे बढ़ाएंगे और उनके लिए ये नीतियां व्यक्तिगत रूप से कितनी महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन का कहना था कि यह सवाल वैकल्पिक है और इसका उद्देश्य राजनीतिक निष्ठा जांचना नहीं है।
कोर्ट ने क्यों लगाई रोक?
फेडरल कर्मचारी यूनियनों ने इस व्यवस्था को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया को राजनीतिक विचारधारा से जोड़ना गैरकानूनी है। मामले की सुनवाई कर रहे जज जॉर्ज ओ’टूल ने माना कि यह सवाल आवेदकों की राजनीतिक संबद्धता और विचारों का आकलन करने वाला नजर आता है।
अदालत के मुताबिक, यह व्यवस्था सिविल सर्विस रिफॉर्म एक्ट के तहत सरकारी नियुक्तियों की गैर-राजनीतिक और योग्यता आधारित प्रकृति से टकरा सकती है। कोर्ट ने यह भी माना कि इससे आवेदकों के प्रथम संशोधन अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल पैदा होते हैं।
70 हजार से ज्यादा नौकरियों पर था असर
रिपोर्ट के मुताबिक, यह सवाल 70,000 से अधिक संघीय नौकरी लिस्टिंग में दिखाई दिया था। इसके चलते अमेरिकी सरकारी भर्ती व्यवस्था में राजनीतिक विचारधारा के बढ़ते प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई थी।
कोर्ट के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश पर कानूनी सवाल और गहरे हो गए हैं, जिसके तहत संघीय कर्मचारियों की भर्ती और प्रशासन में राष्ट्रपति की नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता को ज्यादा महत्व देने की कोशिश की जा रही थी।
फैसले का सीधा मतलब यह है कि फिलहाल संघीय सरकारी नौकरी पाने के लिए आवेदकों को ट्रंप की नीतियों के समर्थन या उन्हें आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताने वाले इस सवाल का सामना नहीं करना होगा।