सुकमा | छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और नक्सल प्रभावित अंचलों तक केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन अब जरूरतमंद परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रहा है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों की गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा संबल साबित हो रही है। सुकमा जिले की श्रीमती शीला कर्मा को इस योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता ने न केवल गर्भावस्था के दौरान उनकी सेहत और पोषण की चिंता को दूर किया, बल्कि उनके परिवार को एक नया आत्मविश्वास भी दिया है।
खाते में सीधे आए 5 हजार रुपये
नगर पालिका परिषद सुकमा के देवी चौक की रहने वाली श्रीमती शीला कर्मा को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत उनके बैंक खाते में सीधे 5,000 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस राशि का उपयोग उन्होंने गर्भावस्था के संवेदनशील दौर में पौष्टिक आहार, जरूरी दवाइयों और अन्य आवश्यक सामग्रियों को खरीदने में किया। समय पर मिली इस मदद से जच्चा और बच्चा दोनों की देखभाल बेहतर तरीके से संभव हो पाई।
भविष्य के लिए भी बचाई राशि
श्रीमती शीला कर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आर्थिक तंगी के इस दौर में सरकार की यह योजना उनके परिवार के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई। उन्होंने बताया कि जरूरी खर्चों को पूरा करने के बाद बची हुई राशि को उन्होंने अपने नवजात शिशु के सुरक्षित भविष्य और उज्ज्वल कल के लिए बैंक खाते में सुरक्षित रख लिया है।
उन्होंने कहा, “मातृत्व के इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना ने एक परिवार के सदस्य की तरह हमारा साथ दिया है।” शीला कर्मा ने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि आज दूरस्थ अंचलों के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाएं डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए सीधे पहुंच रही हैं, जो सरकार की संवेदनशीलता को बयां करती हैं।
क्या है प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना?
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख मातृत्व लाभ योजना है। इसके तहत पहली बार मां बनने वाली गर्भवती एवं धात्री माताओं को सीधे उनके बैंक खाते में आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य:
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महिलाओं के पोषण स्तर में सुधार लाना।
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गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मजदूरी के नुकसान की आंशिक भरपाई करना।
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जच्चा और बच्चा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।