बांग्लादेश । बांग्लादेश इन दिनों गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में रोजाना कई घंटे बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति राजधानी ढाका की तुलना में अधिक गंभीर बताई जा रही है। तेज गर्मी और हीटवेव के बीच बिजली संकट ने आम लोगों के साथ-साथ खेती, उद्योग और कारोबार को भी प्रभावित किया है।
गैस और ईंधन की कमी से घटा बिजली उत्पादन
बांग्लादेश में बिजली संकट की प्रमुख वजह प्राकृतिक गैस और ईंधन की कमी बताई जा रही है। गैस की उपलब्धता कम होने से बिजली उत्पादन में करीब 1,500 मेगावाट की कमी आई है।
इसके अलावा अमेरिकी कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी के LNG टर्मिनल में 21 जुलाई को आग लगने से इसकी क्षमता प्रभावित हुई। खराब समुद्री मौसम के कारण कुछ LNG जहाजों के टर्मिनल तक नहीं पहुंच पाने से गैस आपूर्ति पर दबाव और बढ़ गया।
ग्रामीण इलाकों में 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल
ढाका में फिलहाल बिजली आपूर्ति अपेक्षाकृत सामान्य बताई जा रही है, लेकिन मयमनसिंह, बरिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना समेत कई क्षेत्रों में कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ इलाकों में रोजाना 3 से 5 घंटे, जबकि गंभीर प्रभावित क्षेत्रों में 8 से 10 घंटे तक बिजली कटौती होने की बात कही जा रही है।
बिजली संकट का असर किसानों, कारखानों, रेस्टोरेंट और झींगा पालन जैसे व्यवसायों पर भी पड़ा है। जनरेटर के इस्तेमाल से उत्पादन और संचालन लागत बढ़ रही है।
बिजली संकट के बीच भारत से डीजल की मांग
बिजली संकट से निपटने के लिए बांग्लादेश ने भारत से अतिरिक्त डीजल आपूर्ति की मांग की है। ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद ने भारतीय हाई कमिश्नर से मुलाकात के दौरान डीजल की आपूर्ति बढ़ाने का अनुरोध किया।
भारत और बांग्लादेश के बीच इंडिया-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन के माध्यम से डीजल की आपूर्ति होती है। मौजूदा समझौते के तहत भारत हर साल बांग्लादेश को करीब 1.80 लाख मीट्रिक टन डीजल उपलब्ध कराता है। हालिया क्षेत्रीय संकट के दौरान भारत पहले ही बांग्लादेश को अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति कर चुका है।
लगातार बिजली कटौती से लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। कुछ इलाकों में बिजली सुविधाओं को लेकर विरोध और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आने के बाद बिजली प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए पुलिस की मदद ली जा रही है।