नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के एवियन में आयोजित 52वें G7 शिखर सम्मेलन के दौरान दुनिया के प्रमुख नेताओं को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े खास उपहार भेंट किए। इन तोहफों के जरिए भारत की आयुर्वेद परंपरा, स्थानीय उत्पादों और कारीगरी को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए उपहारों में जम्मू-कश्मीर का रामबन शहद, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा और उत्तर प्रदेश का प्रसिद्ध बनारसी सिल्क स्टोल शामिल रहा।
रामबन शहद हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पतियों से तैयार होने वाला पारंपरिक उत्पाद है, जिसे अपने स्वाद और औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। वहीं मेघालय की लाकाडोंग हल्दी अपने उच्च करक्यूमिन स्तर और स्वास्थ्य लाभों के लिए प्रसिद्ध है।
राजस्थान की नागौरी अश्वगंधा को आयुर्वेद की महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटियों में गिना जाता है। यह उत्पाद भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है।
इसके अलावा वाराणसी के कारीगरों द्वारा तैयार किया गया बनारसी सिल्क स्टोल भारत की सदियों पुरानी बुनाई कला और हैंडलूम परंपरा का प्रतीक रहा। इसकी बारीक जरी कारीगरी ने भारतीय हस्तशिल्प की पहचान को दर्शाया।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्लोवाकिया के स्पीकर रिचर्ड राई को बिहार और झारखंड की पारंपरिक मिठाई ठेकुआ भी भेंट की। छठ पर्व से जुड़ा ठेकुआ पूर्वी भारत की सांस्कृतिक और खान-पान की विरासत को दर्शाता है।
G7 सम्मेलन में फ्रांस, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, कनाडा और यूरोपीय संघ के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक विकास, ग्लोबल साउथ और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भारत का पक्ष रखा।
भारत के पारंपरिक उपहारों के जरिए इस वैश्विक मंच पर देश की संस्कृति, स्थानीय उत्पादों और टिकाऊ जीवनशैली की पहचान को मजबूती मिली।