माखनलाल सरकार, जो वर्तमान में लगभग 98 वर्ष के हैं, भारतीय राजनीतिक इतिहास में लंबे समय से सक्रिय हैं। वे 1952 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की कश्मीर यात्रा के साथी रहे थे और वर्षों तक राष्ट्रवादी आंदोलन में सक्रिय रहे, जिसके चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा।
बीजेपी की स्थापना के बाद 1980 में, माखनलाल सरकार ने बंगाल में पार्टी और संगठन के विस्तार में अहम भूमिका निभाई। वे संगठन की सिलीगुड़ी ज़िला शाखा के संस्थापक अध्यक्ष रहे और सिलीगुड़ी में काम करते हुए तत्कालीन पश्चिम दिनाजपुर, दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी ज़िले के संयोजक के तौर पर सिर्फ एक साल में 10,000 नए सदस्य जोड़े।
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य ने साल पहले अध्यक्ष पद संभालने के बाद माखनलाल के घर जाकर उन्हें सम्मानित किया था। सिलीगुड़ी के बीजेपी नेता तरुण मंडल ने कहा, “माखनलाल सरकार अस्सी के दशक से बंगाल में संगठन के सफ़र के गवाह रहे हैं और उन्होंने प्रचार की चकाचौंध से दूर रहते हुए संगठन की जड़ें मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।”
बंगाल चुनाव में बीजेपी की हालिया जीत के बाद माखनलाल सरकार फिर से सुर्खियों में आए। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन्होंने सिलीगुड़ी में गो-हत्या बंद कराई थी और सिलीगुड़ी सीट पर शंकर घोष की उम्मीदवारी का फैसला भी उन्होंने ही किया था।
इस मौके पर माखनलाल सरकार ने कहा, “मैं बेहद खुश हूं। मेरे जीवन भर की मेहनत कामयाब हुई है।”
माखनलाल सरकार का यह योगदान पश्चिम बंगाल में बीजेपी की मजबूती और संगठन के इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।