नई दिल्ली। पितृ पक्ष 2026 की शुरुआत हो चुकी है। हिंदू परंपरा में यह अवधि दिवंगत पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और तर्पण, श्राद्ध व दान-पुण्य करने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस साल पितृ पक्ष की मुख्य शुरुआत 27 सितंबर 2026 को प्रतिपदा श्राद्ध से हुई और इसका समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया गया था।
धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष के दौरान कुछ पशु-पक्षियों को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इन दिनों यदि कुछ खास जीव घर के आसपास दिखाई दें या भोजन ग्रहण करें तो इसे पूर्वजों की ओर से शुभ संकेत माना जाता है। हालांकि, ये धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं, इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
1. कौआ
पितृ पक्ष में कौए का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। कई हिंदू परिवारों में श्राद्ध का भोजन पहले कौए के लिए निकाला जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार कौए को पितरों से जुड़ा संदेशवाहक माना जाता है।
यदि पितृ पक्ष के दौरान कौआ घर की छत, बालकनी या आंगन में आए और रखा हुआ भोजन ग्रहण करे, तो इसे पितरों की तृप्ति का संकेत माना जाता है।
2. काला कुत्ता
पितृ पक्ष की परंपराओं में कुत्ते को भी भोजन कराने का उल्लेख मिलता है। कुछ धार्मिक मान्यताओं में कुत्ते का संबंध भगवान भैरव और यम से जोड़ा जाता है।
यदि इन दिनों घर के बाहर काला कुत्ता दिखाई दे या भोजन की अपेक्षा करे, तो उसे भोजन कराने की परंपरा है। इसे पितरों के प्रति श्रद्धा और जीव सेवा से भी जोड़ा जाता है।
3. गाय
हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना गया है। श्राद्ध कर्म में गोग्रास निकालने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है।
पितृ पक्ष में गाय को भोजन कराना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। यदि गाय घर के दरवाजे पर आ जाए तो कई लोग इसे अच्छा संकेत मानकर उसे भोजन कराते हैं।
4. काली चींटियां
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष में काली चींटियों को भोजन कराना भी पुण्यकारी माना जाता है। घर के आसपास चींटियां दिखाई देने पर उन्हें आटा या चीनी खिलाने की परंपरा कुछ परिवारों में है।
इसे जीवों के प्रति दया और पितरों के निमित्त किए जाने वाले दान-पुण्य का हिस्सा माना जाता है।
5. चिड़िया या गौरैया
पितृ पक्ष के दौरान घर की बालकनी, आंगन या आसपास चिड़ियों का आना भी कुछ धार्मिक मान्यताओं में शुभ माना जाता है। चिड़ियों को दाना-पानी उपलब्ध कराना जीव सेवा के रूप में देखा जाता है।
यदि चिड़िया घर के आसपास दाना चुगती है या घोंसला बनाती है, तो इसे कुछ ज्योतिषीय मान्यताओं में सकारात्मक संकेत बताया गया है।
पितृ पक्ष में पंचबलि की भी परंपरा
श्राद्ध कर्म से जुड़ी परंपराओं में पंचबलि का उल्लेख मिलता है। इसमें भोजन का एक हिस्सा गाय, कुत्ते, कौए, चींटियों और देवताओं के निमित्त निकालने की परंपरा बताई गई है। कई परिवार इसे श्राद्ध कर्म का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका श्राद्ध निर्धारित तिथि पर नहीं हो पाया।
पितृ पक्ष में पशु-पक्षियों को भोजन-पानी देना धार्मिक परंपरा के साथ-साथ जीवों के प्रति दया और सेवा का भाव भी दर्शाता है। इसलिए किसी जीव को केवल शकुन या अपशकुन मानकर परेशान करने के बजाय उसके प्रति करुणा और सम्मान का व्यवहार करना उचित है।