रायपुर । उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने छत्तीसगढ़ के प्रथम लोकपर्व हरेली को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया। नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास में उन्होंने गौमाता और कृषि औजारों नांगर, गैती और कुदारी की विधिवत पूजा-अर्चना की।
हरेली के अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने अपने निवास के प्रवेश द्वार पर आरोग्य और हरियाली के प्रतीक नीम की डाली भी लगाई। उन्होंने ईश्वर से प्रदेश में अच्छी बारिश, खेतों में भरपूर फसल और सभी प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की।
हरेली छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति का पर्व
उप मुख्यमंत्री साव ने प्रदेशवासियों को हरेली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व छत्तीसगढ़ की माटी, खेती-किसानी, प्रकृति और लोक संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। हरेली में गेड़ी सहित अनेक पारंपरिक लोक परंपराओं की झलक देखने को मिलती है।
उन्होंने कहा कि हरेली केवल कृषि औजारों और पशुधन की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति और अन्नदाता के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर भी है।
लोक परंपराओं के संरक्षण पर जोर
अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराएं और त्योहार प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान हैं। इन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना और उनका संरक्षण एवं संवर्धन करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने हरेली के माध्यम से प्रदेश में हरियाली, कृषि समृद्धि और खुशहाली की कामना की।