एनएमडीसी ने बस्तर में 5,427 करोड़ रुपये की एकीकृत लौह अयस्क परियोजना की शुरुआत की

हैदराबाद ।  ने छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में लौह अयस्क मूल्य-श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल करते हुए नगरनार में 2 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाले पेलेट संयंत्र को शुरू किया है। यह संयंत्र 5,427 करोड़ रुपये की लागत वाली एकीकृत परियोजना का हिस्सा है, जिसमें लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र और स्लरी पाइपलाइन भी शामिल हैं।

इस एकीकृत परियोजना के तहत बचेली में नया लौह अयस्क प्रसंस्करण संयंत्र, 15 एमटीपीए क्षमता की 135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन और नगरनार में 2 एमटीपीए क्षमता का पेलेट संयंत्र विकसित किया गया है। पाइपलाइन के माध्यम से बचेली से नगरनार तक संसाधित लौह अयस्क कॉन्संट्रेट पहुंचाया जाएगा, जिससे सड़क मार्ग से अयस्क परिवहन के विकल्प के साथ रेलवे पर निर्भरता भी कम करने में मदद मिलेगी।

बैलाडीला के फाइन्स और स्लाइम्स का होगा बेहतर उपयोग

नई सुविधाओं के संचालन से एनएमडीसी को अपनी बैलाडीला खदानों से निकलने वाले लौह अयस्क के फाइन्स और स्लाइम्स को कॉन्संट्रेट में प्रसंस्कृत करने तथा इसके बाद उसे पेलेट में बदलने की सुविधा मिलेगी। नगरनार स्थित पेलेट संयंत्र में इस्पात निर्माण के लिए पेलेट तैयार करने के लिए स्ट्रेट ग्रेट इंडुरेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पेलेट संयंत्र से प्रथम उत्पादन की प्रक्रिया की निगरानी एनएमडीसी मुख्यालय से अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी और कंपनी के वरिष्ठ नेतृत्व ने की। खराब मौसम के कारण कंपनी का वरिष्ठ नेतृत्व परियोजना स्थल तक नहीं पहुंच सका।

‘लंबे समय से इस दिन का इंतजार था’

इस अवसर पर एनएमडीसी के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि परियोजना का पूरा होना कंपनी के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ स्लरी पाइपलाइन और पेलेट संयंत्र को शामिल करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन लंबे समय से देखा जा रहा सपना अब साकार हुआ है।

61 गांवों से होकर गुजरेगी स्लरी पाइपलाइन

135 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन बस्तर और दंतेवाड़ा जिलों के 61 गांवों से होकर गुजरती है। इसे संसाधित लौह अयस्क की आवाजाही के लिए सड़क परिवहन का वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराने और रेलवे पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इससे बचेली के खनन संचालन और नगरनार के बीच एक समर्पित परिवहन लिंक स्थापित हुआ है।

100 मिलियन टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य

एनएमडीसी के अनुसार, यह परियोजना कंपनी की व्यापक विस्तार और विविधीकरण रणनीति का हिस्सा है। कंपनी दीर्घकाल में अपनी लौह अयस्क उत्पादन क्षमता को 100 मिलियन टन तक बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। नई परियोजना से खनन और बेनिफिशिएशन से लेकर स्लरी परिवहन तथा पेलेट उत्पादन तक कंपनी की एकीकृत लौह अयस्क मूल्य-श्रृंखला और मजबूत होगी। साथ ही, पेलेट के रूप में एक नया मूल्य-संवर्धित उत्पाद भी कंपनी के पोर्टफोलियो में शामिल होगा।

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