किरंदुल। विकासखंड कुआकोंडा में बहुभाषी शिक्षा (MLE) कार्यक्रम के तहत छह दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान (FLN) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रशिक्षण में ब्लॉक के 30 चयनित स्कूलों के शिक्षक शामिल हो रहे हैं।
कार्यशाला का शुभारंभ विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार भदौरिया, सहायक खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार राठौर, लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) के ब्लॉक समन्वयक एस.आर. भारती, मास्टर ट्रेनर्स सुनील सिन्हा, अमर कुमार निहाल, रतन लाल कंवर और राजेंद्र कुमार सहित शिक्षकों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
मातृभाषा में शिक्षा पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बीईओ प्रमोद कुमार भदौरिया ने कहा कि दंतेवाड़ा जैसे जनजातीय बहुल क्षेत्र में कई बच्चे घर पर गोंडी सहित स्थानीय भाषाओं का उपयोग करते हैं, जबकि स्कूल में पढ़ाई मुख्य रूप से हिंदी में होती है। भाषा के इस अंतर के कारण शुरुआती कक्षाओं में बच्चों को सीखने में कठिनाई हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जब बच्चे अपनी घर की भाषा में सीखते हैं तो वे बिना झिझक अपनी बात रख पाते हैं और सीखने की प्रक्रिया में अधिक सक्रियता से भाग लेते हैं। उन्होंने शिक्षकों से कक्षाओं में स्थानीय भाषा के साथ द्विभाषी शिक्षण पद्धति का प्रभावी उपयोग करने की अपील की।
शिक्षण सामग्री के इस्तेमाल का मिलेगा प्रशिक्षण
सहायक खंड शिक्षा अधिकारी मनोज कुमार राठौर ने शिक्षकों से प्रशिक्षण को केवल औपचारिकता न मानकर कक्षा शिक्षण को अधिक प्रभावी और रोचक बनाने के अवसर के रूप में लेने की अपील की।
वहीं, LLF के ब्लॉक समन्वयक एस.आर. भारती ने बताया कि संस्था की ओर से शिक्षकों के सहयोग से द्विभाषी अभ्यास पुस्तिका, कहानी, वर्ण कार्ड, चित्र चार्ट, बिग बुक और ग्रिड कार्ड जैसी विभिन्न शिक्षण सामग्री तैयार की गई है।
छह दिनों तक चलने वाले प्रशिक्षण में इन सामग्रियों के प्रभावी उपयोग के साथ-साथ द्विभाषी शिक्षण की व्यावहारिक तकनीकों पर शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा या घर की भाषा के माध्यम से सीखने का बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।